SHARAD PURNIMA 2022- VRAT, PUJA VIDHI OR SHUBH MUHURT- शरद पूर्णिमा का व्रत, पूजा विधि एवं शुभ मुहूर्त

SHARAD PURNIMA 2022-
अश्विन मास की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहते हैं। भारतवर्ष के शास्त्रों में उल्लेख है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी दिन अमृत निकला था। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है एवं जो व्यंजन चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे रखे जाते हैं, उनमें कई प्रकार के रोगों का नाश करने की शक्ति का संचार होता है और ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने वाले व्यक्ति की आयु में वृद्धि होती है। 

शरद पूर्णिमा चंद्रमा का त्यौहार है। शरद पूर्णिमा के अवसर पर चंद्रमा ग्रह के खाद्य पदार्थों (दूध-चावल सहित सफेद रंग के सभी खाद्य पदार्थ) के व्यंजन बनाए जाते हैं। पंचांग के अनुसार भारत के विभिन्न क्षेत्रों में दिनांक 9 अक्टूबर 2022 को 03:41 AM बजे से (भौगोलिक दृष्टि से यह समय भारत में थोड़ा आगे पीछे रहेगा) पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होती है और 10 अक्टूबर की रात्रि 02:24 AM बजे तक पूर्णिमा तिथि रहेगी।

सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर की सफाई करें। ध्यान पूर्वक माता लक्ष्मी और श्रीहरि की पूजा करें। फिर गाय के दूध में चावल की खीर बनाकर रख लें। लक्ष्मी माता और भगवान विष्णु की पूजा करने के लिए लाल कपड़ा या पीला कपड़ा चौकी पर बिछाकर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा इस पर स्थापित करें। तांबे अथवा मिट्टी के कलश पर वस्त्र से ढंकी हुई लक्ष्मी जी की स्वर्णमयी मूर्ति की स्थापना कर सकते हैं।

भगवान की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं, धूप करें। इसके बाद गंगाजल से स्नान कराकर अक्षत और रोली से तिलक लगाएं। तिलक करने के बाद मीठे ( सफेद या पीली मिठाई ) से भोग लगाएं। लाल या पीले पुष्प अर्पित करें। माता लक्ष्मी को गुलाब का फूल अर्पित करना विशेष फलदाई होता है। शाम के समय चंद्रमा निकलने पर मिट्टी के 100 दीये या अपनी सामर्थ्य के अनुसार दीये गाय के शुद्ध घी से जलाएं।

इसके बाद खीर को कई छोटे बर्तनों में भरकर छलनी से ढककर चंद्रमा की रोशनी में रख दें। फिर पूरी रात (तड़के 3 बजे तक, इसके बाद ब्रह्म मुहूर्त शुरू हो जाता है) जागते हुए विष्णु सहस्त्रनाम का जप, श्रीसूक्त का पाठ, भगवान श्रीकृष्ण की महिमा, श्रीकृष्ण मधुराष्टकम् का पाठ और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। पूजा की शुरुआत में भगवान गणपति की आरती अवश्य करें।

अगली सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके उस खीर को मां लक्ष्मी को अर्पित करें और प्रसाद रूप में वह खीर घर-परिवार के सदस्यों में बांट दें। इस प्रकार जगतपालक और ऐश्वर्य प्रदायिनी की पूजा करने से सभी मनवांछित कार्य पूरे होते हैं। साथ ही हर तरह के कर्ज से मुक्ति मिलती है।

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