भारत में व्यापार की कितनी आजादी और कितनी पाबंदी, यहां पढ़िए - Fundamental rights

दुनिया के कुछ देशों में आज भी व्यापार करने की आजादी नहीं है। वहां के नागरिक अपनी मर्जी से अपने लिए बिजनेस ट्रेड का चुनाव नहीं कर सकते। कुछ देशों में देर तक दुकान खोलने पर जुर्माना लगता है और कुछ देश टाइम टेबल से पहले दुकान बंद करने पर जुर्माना वसूल करते हैं। जैसे उत्तर कोरिया में सरकार निर्धारित करती है कि आप बिजनेस करेंगे, सरकारी नौकरी करेंगे या फिर आप से मजदूरी करवाई जाएगी। 

भारत के संविधान में नागरिकों को व्यापार की स्वतंत्रता भी प्रदान की है। भारत के नागरिक ना केवल अपने मूल निवास स्थान पर बल्कि भारत के किसी भी राज्य में किसी भी प्रकार का वैधानिक व्यापार कर सकते हैं। सरकार ने केवल ऐसे कारोबार पर प्रतिबंध लगाया है जो नागरिकों के लिए हानिकारक है और कानूनी तौर पर अवैध घोषित किए गए हैं। दुकान खोलने और बंद करने का समय आप स्वयं निर्धारित कर सकते हैं। भारत में सरकार इंटरफेयर नहीं करती।

भारतीय संविधान अधिनियम, 1950 के अनुच्छेद 19(1)(छ) की परिभाषा

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(छ) सभी नागरिकों को व्यवसाय (वृत्ति), उपजीविका, व्यापार एवं कारोबार शुरू करने के लिए स्वतंत्रता प्रदान करता है। वह किसी भी समय अपना व्यवसाय स्थापित कर सकते हैं एवं उसे सामान्य स्थिति में बंद भी अपनी मर्जी से कर सकते हैं। यहाँ सामान्य स्थिति का अर्थ है जिससे किसी आम जनता को क्षति न हो तब।

व्यापार एवं व्यवसाय की स्वतंत्रता पर कब रोक लगाई जा सकती है जानिए:-

• कोई ऐसा व्यवसाय या कारोबार जिससे जनता के हितों के लिए सही नहीं है।
• कोई ऐसा व्यवसाय या व्यापार जिसमे अयोग्यता या आवश्यक व्यवसाय संबंधित सूचना देकर प्रारम्भ किया गया हो।
• नागरिकों द्वारा किसी व्यापार या कारोबार का बहिष्कार किया गया हो।

अर्थात भारतीय नागरिकों को अपनी मर्जी से व्यापार, व्यवसाय, कारोबार करने की स्वतंत्रता तो प्राप्त है लेकिन उपर्युक्त शर्तो के अनुसार ही प्राप्त है।
Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

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