भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद योग्यता में परिवर्तन विधि विरुद्ध: हाई कोर्ट ने तलब किया- MP NEWS

जबलपुर
। सरकारी नौकरी प्रक्रिया में भर्ती विज्ञापन जारी हो जाने के बाद संशोधन के माध्यम से योग्यता में परिवर्तन विधि विरुद्ध है। हाईकोर्ट ने इस बात से सहमत होते हुए शासन को तलब किया है। उल्लेखनीय है कि लोक शिक्षण संचालनालय ने व्यवसायिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के बीच में उम्मीदवारों की निर्धारित योग्यता में परिवर्तन कर दिया है। यही विवाद हाईकोर्ट में पहुंच गया है।

अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी ने बताया कि रजनी पटेल, सीमा, सोनम, आसरीन खान, रानी गंगवाल, प्राची आर्य, दीपा, मनीषा, सीता गुप्ता, श्रद्धा पांडेय, आम्रपाली, मीना यादव, शिवांगी, शबाना, मीनाक्षी पारे, शालू, शालिनी, शिल्पा, नेहा, दीप बाला, लीना, सरिता, अस्विनी, इंतेयाज़ , लीला ठाकरे, परवीन खान, संध्या मर्थे, मोनिका सोनी, ममता, वैशाली बोरकर, अन्नपूर्णा पारधी विभिन्न जिलों में व्यवसायिक शिक्षक के रूप में वर्ष 2017 एवं उसके बाद से कार्य कर रहे हैं। 

आदेश दिनाँक 17/07/21 जारी कर आयुक्त लोक शिक्षण ने पूर्व से कार्यरत व्यवसायिक शिक्षकों के स्थान पर नवीन व्यवसायिक शिक्षक भर्ती की योजना को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। कोर्ट के आदेश के बाद, शासन ने भर्ती योजना को निरस्त कर, पूर्व से कार्यरत व्यवसायिक शिक्षकों के दस्तावेज योग्यता के आधार पर सत्यापन कर नियुक्ति देने का निर्णय लिया। 

डाक्यूमेंट्स अनुवीक्षण के समय, 6 महीने का डिप्लोमा या मान्यता प्राप्त डिप्लोमा, वोकेशनल शिक्षक के पास नही होने के आधार पर व्यवसायिक शिक्षकों को नियुक्ति हेतु, अपात्र किया जा रहा था। आयुक्त के अनुसार, डिप्लोमा एक वर्षीय मान्यता प्राप्त संस्था से होना चाहिए। पीड़ित होकर, 17 व्यावसायिक शिक्षकों द्वारा उच्च न्यायालय, जबलपुर की शरण ली गई थी। 

उनकी ओर से वकील, श्री अमित चतुर्वेदी ने कोर्ट के समक्ष तर्क रखे कि, आरंभिक नियुक्ति के समय 6 माह का डिप्लोमा अनिवार्य था। विज्ञापन दिनाँक 17/7/21 में भी एक वर्षीय डिप्लोमा का उल्लेख नही है। दिनाँक 8/06/22 के स्पष्टीकरण द्वारा योग्यता परिवर्तन विधि विरुद्ध है। व्यावसायिक शिक्षकों को अपात्र किया जाना, शासन के द्वारा कोर्ट के समक्ष दिए गए हलफनामा के विरुद्ध है। अतः व्यवसायिक शिक्षकों को सेवा से पृथक करने पर रोक लगाई जाए। 

उच्च न्यायालय की युगल पीठ ने अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी के तर्कों से सहमत होकर,  याचिका में शामिल व्यवसायिक शिक्षकों के सेवा से पृथक करने पर रोक लगाते हुए, शासन को तलब किया है।