क्या मुस्लिम या अन्य धर्म की महिला भी भरण पोषण का दावा कर सकती है- Decision of the Supreme Court

Bhopal Samachar
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जब कोई माता-पिता, बेटी, स्त्री आदि बेसहारा हो जाते है तब वह अपने विधिक संरक्षक व्यक्ति से गुजारा भत्ता लेने का हक रखते हैं। एक महत्वपूर्ण मामले में उच्चतम न्यायालय कहा हैं कि स्त्री का भरण पोषण का अधिकार एक सांविधिक अधिकार है। इस अधिकार को किसी करार (संविदा, अग्रीमेंट) द्वारा समाप्त नहीं किया जा सकता है। आज सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति अपनी विशेष विधि के संरक्षण (मुस्लिम पर्सनल लॉ आदि) में भरण पोषण भत्ता देने से इनकार कर सकता है जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण जजमेंट।

मोहम्मद अहमद बनाम शाह बनो बेगम (1985)

उक्त वाद में उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 एवं मुस्लिम पर्सनल विधि के बीच कोई टकराव नहीं है। मुस्लिम पर्सनल विधि में मुस्लिम पति का दायित्व सीमित है कि वह तलाकशुदा पत्नी को इद्दत (प्रतीक्षा की अवधि) तक बनाए रखे अर्थात तलाकशुदा पत्नी की प्रतीक्षा अविधि तीन माह होती हैं और मुस्लिमों पर्सनल लॉ के अनुसार पति इस अवधि तक उसका विधिक संरक्षण हो सकता है। 

लेकिन उच्चतम न्यायालय ने उक्त वाद में यह अभिनिर्धारित किया है कि यदि मुस्लिम तलाकशुदा पत्नी स्वयं को बनाए रखने में असमर्थ हैं तो वह दण्ड संहिता,1973 की धारा 125 का सहारा लेने की हकदार है एवं यह धारा 125 तलाकशुदा मुस्लिम स्त्री पर तब तक लागू होती हैं जब तक वह पुनर्विवाह नहीं कर लेती है।

बेगम सबनो बनाम एएम अब्दुल गफूर (1987) 

न्यायालय ने उक्त वाद में स्पष्ट कर दिया कि एक मुस्लिम पत्नी निश्चित रूप से पति की सहमति और किसी कारणवश दी गई स्वंय की सहमति (अर्थात दोनो की सहमति) से अलग रह सकती है और इस आधार पर भरण पोषण का दावा करने का हक रखती है कि पति के दूसरे विवाह से उसको मानसिक पीड़ा, क्रूरता हुई है। ऐसी स्थिति में मुस्लिम पति व्यक्तिगत विधि का किसी भी प्रकार से आश्रय नहीं ले सकता है एवं दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 से मुक्त भी नहीं किया जाएगा।

नानक चंद्र बनाम चंद्र किशोर (1969) 

उक्त वाद में न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 से 128 के प्रावधान सभी धर्मों के सभी व्यक्तियों पर लागू होते हैं उनका कोई भी पक्षकार व्यक्तिगत विधि का लाभ नहीं ले सकते हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

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