JU GWALIOR NEWS- हद कर दी, एग्जाम हॉल में आंसर शीट बांटने के बाद पेपर कैंसिल

ग्वालियर
। स्टूडेंट के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ और इतना बकवास मैनेजमेंट शायद ही किसी यूनिवर्सिटी में देखने को मिले। जीवाजी यूनिवर्सिटी ग्वालियर में स्टूडेंट्स एग्जाम हॉल में पहुंच गए, उन्हें आंसर शीट बांट दी गई, आधे घंटे बाद बताया गया कि पेपर नहीं आया है इसलिए परीक्षा स्थगित की जाती है।

परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे बाद पता चला कर्मचारी की चुनाव ड्यूटी लगी है

जीवाजी यूनिवर्सिटी के परीक्षा भवन में मंगलवार को आयोजित परीक्षा में दो विषयों के पेपर नहीं पहुंचे। दोपहर 3 से शाम 6 बजे की पाली में हुई परीक्षा में शिक्षकों ने परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका बांट दी। 30 मिनट तक परीक्षार्थी पेपर के इंतजार में बैठे रहे। इस दौरान यहां ड्यूटी देने वाले परीक्षकों के पास परीक्षा नियंत्रक प्रो. अनिल श्रीवास्तव ने सूचना भिजवाई कि पेपर भेजने का काम जिस कर्मचारी की जिम्मे था, वह चुनाव में ड्यूटी है। ऐसे में एमजेएमसी चौथे सेमेस्टर कम्यूनिकेशन रिसर्च व एमए सोशलॉजी चौथे सेमेस्टर का पेपर स्थगित करना होगा। यह बात सुन विद्यार्थी हतप्रभ रहे गए। परीक्षकों ने ऐसे विद्यार्थियों से उत्तर पुस्तिका वापस लेते हुए कहा कि अब उक्त विषय का पेपर बाद में होगा। इसकी तारीख बाद में जारी की जाएगी। 

पेपर है या पापड़, जो कम पड़ गए

एमए इंग्लिश लिटरेचर के पेपर भी कम पड़ गए। 13 परीक्षार्थियों के बीच में 10 पेपर थे। जिसके बाद 3 परीक्षार्थियों को पेपर के फोटो कॉपी कराकर दी गई। तब जाकर वह परीक्षा दे सके। सवाल यह है कि पेपर है या पापड़ जो कम पड़ गए। स्टूडेंट्स की संख्या को ध्यान में रखते हुए पेपर प्रिंट कराए जाते हैं। प्रिंट किए हुए पेपर चेक किए जाते हैं। कुछ एक्स्ट्रा पेपर भी होते हैं। कोई मैनेजमेंट इतना घटिया कैसे हो सकता है

JU GWALIOR- परीक्षा नियंत्रक के जवाब को 10 में से कितने नंबर देंगे आप

प्रो. अनिल शर्मा, परीक्षा नियंत्रक का कहना है कि परीक्षा भवन में दो विषयों का पेपर इसलिए नहीं पहुंच सका क्योंकि जिस कर्मचारी की स्ट्रांग रूम से पेपर भिजवाने की जिम्मेदारी दी उसकी चुनाव में ड्यूटी लगी है। एमजेएमसी व एमए सोशलाॅजी चौथे सेमेस्टर का पेपर स्थगित करना पड़ी। सवाल यह है कि क्या उसकी अचानक चुनाव ड्यूटी लग गई थी। मैनेजमेंट को इतना भी पता नहीं है कि कितने कर्मचारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी है और उनकी जिम्मेदारी किसी दूसरे कर्मचारी को दी जानी है। अब उच्च शिक्षा विभाग और आम जनता को तय करना है कि परीक्षा नियंत्रक की इस जवाब को 10 में से कितने नंबर दिए जाएं। हम तो इसके लिए 00 भी ज्यादा मानते हैं। अयोग्यता प्रमाणित हो चुकी है। सेवाएं समाप्त कर दी जानी चाहिए।