ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले फर्जी एजेंट, संकलनकर्ता के खिलाफ क्या कार्यवाही होगी जानिए- MV Act,1988

मोटर यान अधिनियम,1988 की धारा 93 के अनुसार स्पष्ट बताया गया है कि कोई भी व्यक्ति वाहन लाइसेंस के लिए एजेंट, प्रचारक या संकलनकर्ता (डाटा एकत्रित करने वाला व्यक्ति) के कार्य करने से पहले प्राधिकरण अधिकारी से अनुज्ञप्ति प्राप्त करेगा एवं उन सभी शर्तो का पालन करेगा जो राज्य सरकार द्वारा बनाई गई हो, एवं अनुज्ञप्ति की जो फीस हैं वह देय करेगा।

प्रत्येक अनुज्ञप्ति प्राप्त एजेंट, प्रचारक किसी समाचार-पत्र, पुस्तक, सूची, वर्गीकृत निदेशिका या अन्य प्रकाशन में तब तक विज्ञापन नहीं देगा जब तक की वह अनुज्ञप्ति देने वाले अधिकारी से मंजूरी नहीं ली हो। एवं प्रत्येक संकलनकर्ता का कर्तव्य है की वह आईटी एक्ट,2000 के अधीन बनाए गए नियमो का पालन कर कार्य करे। अगर कोई व्यक्ति फर्जी एजेंट, प्रचारक या संकलनकर्ता के रूप में या नियमो का उल्लंघन कर कार्य करता है तब ऐसे व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्यवाही होगी पढ़िए।

मोटर यान अधिनियम,1988 की धारा 193 की परिभाषा:-

1. अगर कोई व्यक्ति अधिनियम की धारा 93 का उल्लंघन कर फर्जी एजेंट, प्रचारक के रूप में काम करता है या एजेंट, प्रचारक होते हुए नियमो का उल्लंघन करता है तब ऐसे व्यक्ति को एक हजार रुपए के जुर्माना से दण्डित किया जाएगा, अगर यही अपराध दोबारा करता हैं तब छः माह की कारावास या दो हजार रुपए जुर्माना या दोनो से दण्डित किया जाएगा। 

2. अगर कोई व्यक्ति धारा 93 या उसके अधीन बनाए किसी नियमो का उल्लंघन करेगा जो संकलनकर्ता (डाटा एकत्रित) करने का कार्य करता है तब ऐसे व्यक्ति को अधिकतम एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, लेकिन पच्चीस हजार से कम नही होगा।

3. अगर कोई अनुज्ञप्ति प्राप्त संकलनकर्ता राज्य सरकार द्वारा बनाए गए किसी भी नियम का जानबूझकर कर उल्लंघन करता है जो शर्त के रूप में नमोदीर्ष्ट नहीं है, तब ऐसे संकलनकर्ता पर पाँच हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

:- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665
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