MP TET VARG 3 TOPIC- बाल केंद्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा

Concept Of Child Centered and Progressive Education

आज हम बाल केंद्रित शिक्षा से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य पर चर्चा करेंगे। बाल केंद्रित शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय शिक्षा गिजू भाई बधेका ने विशेष योगदान दिया। बाल केंद्रित शिक्षा का श्रेय शिक्षा मनोविज्ञान को ही दिया जाता है, जिसका उद्देश्य बालक के मनोविज्ञान (मन के विज्ञान) को समझते हुए शिक्षण की व्यवस्था करना तथा उसकी अधिगम संबंधी कठिनाइयों को दूर करना होता है। 

बाल केंद्रित शिक्षा के अंतर्गत बालक की शारीरिक और मानसिक योग्यताओं के आधार पर ही उसे अवसर प्रदान किये जाते हैं तथा बालक के व्यवहार और व्यक्तित्व में असमानता के लक्षण होने पर उसकी बौद्धिक दुर्बलता, समस्यात्मक बालक, बाल अपराधी इत्यादि का निदान किया जाता है।

शिक्षा एक द्विध्रुवीय प्रक्रिया / Education As Bipolar Process

(Adams) डम्स ने अपनी बुक  "एवोल्यूशन ऑफ एजुकेशन थ्योरी" "Evolution of Education Theory" ने बताया कि शिक्षा एक द्विध्रुवीय प्रक्रिया है जिसमें  एक  ध्रुव  पर टीचर(Educator) और दूसरे सिरे पर  विद्यार्थी(Educant) होता है। जिसमें शिक्षक के आचार विचार और व्यक्तित्व का प्रभाव विद्यार्थी पर पड़ता है। 

शिक्षा एक त्रिध्रुवीय प्रक्रिया / Education As A Tripolar process

जॉन डीवी (John Dewey) जिन्हें प्रगतिशील शिक्षा का जनक कहा जाता है उनके अनुसार शिक्षा एक त्रिध्रुवीय प्रक्रिया है जिसमें एक सिरे पर शिक्षक(Teacher), दूसरे सिरे पर विद्यार्थी (Student) और तीसरे सिरे पर पाठ्यक्रम (Curriculum) होता है। इसलिए शिक्षक और पाठ्यक्रम का चुनाव करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों ही विद्यार्थी को प्रभावित करते हैं।

बच्चे खाली स्लेट की तरह / Children As Tabula Rasa

पहले  जब शिक्षक केंद्रित शिक्षा होती थी तब बच्चों को खाली स्लेट (Tabula Rasa) कहा जाता था यानी शिक्षक ज्ञान का भंडार है और वह अपना ज्ञान, बच्चे के अंदर उड़ेल देंगा। जैसा कि आपने "पीके" फिल्म में देखा होगा कि किस तरह से थोड़े से ही समय में फिल्म के हीरो के अंदर  पूरा ज्ञान उड़ेल दिया जाता है।

बच्चे एक नन्हे पौधे की तरह / Children As Little Plant  or Sapling

 बाल केंद्रित शिक्षा के अंतर्गत बच्चे को एक नन्हा पौधा माना जाता है जो कि जिसके अंदर क्षमताएं मौजूद हैं और शिक्षक का काम है उसे फलने-फूलने के अवसर प्रदान करना। जिस तरह से एक छोटे पौधे को हम मिट्टी, खाद, पानी आदि डालकर उसका पालन पोषण करते हैं। उसी तरह हमें बच्चों को भी अपने अनुभव से, सिंचित करना है ना कि उनके ऊपर अपना ज्ञान थोपना है परंतु ध्यान रहे कि प्रत्येक बच्चा अलग है और अलग तरीके से सीखता है। इसीको विभेदी अनुदेशन (Differentiated Instructions) कहा जाता है। 

शिक्षा के प्रकार / Types Of Education

1. औपचारिक (Formal)-  वह शिक्षा जो स्कूल, कॉलेज या अन्य शैक्षणिक संस्थानों से प्राप्त की जाती है। जिसमें एक नियंत्रित वातावरण में सिखाया जाता है। 
2. अनौपचारिक (Informal)-  वह शिक्षा जो परिवार, पास -पड़ोस, वातावरण, मीडिया, सिनेमा, खेल का मैदान पुस्तकालय आदि से बच्चा स्वतः ही अर्जित कर लेता है। इसके लिए बच्चे को कोई ड्रेस कोट पहन कर नहीं बैठना होता। 

3. निरौपचारिक (Non-formal)- यह विशेष प्रकार की शिक्षा होती है जो कि घर बैठे ही करेस्पॉन्ड कोर्स से या समर इंस्टिट्यूट से, जॉब की ट्रेनिंग के लिए, रेडियो और टेलीविजन, इंटरनेट से या ओपन यूनिवर्सिटीज से ली जा सकती है। प्रौढ़ शिक्षा भी इसी के अंतर्गत आती है जो कि विशेष वर्ग या आयु वर्ग के लिए होती है। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.