MP TET VARG-3 TOPIC - भाषा विकार, Language Disorder

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बाल विकास के विभिन्न आयामों में से एक आयाम भाषा भी है। भाषा हमारी बौद्धिक क्षमता को भी अभिव्यक्त करती है। अपनी इच्छाओं और आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, दूसरों का ध्यान आकर्षित करने के लिए, सामाजिक संबंध के लिए, शैक्षिक उपलब्धि के लिए, यानी की भाषा हर प्रकार से उपयोगी है। 

जिस प्रकार बाल विकास को बहुत से कारक प्रभावित करते हैं, उसी तरह भाषा विकास को भी कई प्रकार के कारक प्रभावित करते हैं। इनमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य, बुद्धि, परिवार की सामाजिक -आर्थिक स्थिति, परिवार का आकार, द्विभाषावाद, भाषा प्रशिक्षण विधि आदि प्रमुख हैं। 

परंतु यदि कोई बच्चा जब अपने स्वर यंत्रों पर नियंत्रण नहीं रख पाता तो उसमें भाषाई दोष या विकार (Language Disorder) उत्पन्न हो जाते हैं, तो भाषा दोष से ग्रसित बालक समाज से कतराने लगता है और उसमें हीनता की भावना आने लगती है और वह  अंतर्मुखी स्वभाव का हो जाता है। यह भाषा दोष उस बच्चे के शैक्षिक विकास को भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है। मुख्य रूप से भाषा दोष में ध्वनि परिवर्तन, अस्पष्ट उच्चारण, हकलाना, तुतलाना, तीव्र अस्पष्ट वाणी आदि हैं।

प्रमुख भाषा विकार/ Main Language Disorders

वैसे तो बच्चों में कई प्रकार की विकलांगता (Disorders or Disabilities) पाई जाती है जैसे- शारीरिक(Physical), मानसिक(Mental) और अधिगम अशक्तता (Learning Disability) आदि परंतु आज हम भाषा के चारों कौशलों यानी सुनना, बोलना, लिखना और पढ़ना। इन चारों से संबंधित दोषों की ही चर्चा करेंगे। 

सुनने से संबंधित भाषा दोष (Language Disorders Related with Listening) 

सीखने में सुनने की क्रिया का महत्वपूर्ण स्थान होता है जो बच्चे श्रवण संबंधी दोषों से ग्रस्त से ग्रस्त से ग्रस्त होते हैं, उन्हें भाषा सीखने में भी कठिनाई होती है। श्रवण दोष के कई कारण हो सकते हैं जैसे- कान की बनावट में दोष, कानों का अक्सर बहते रहना, कानों में दर्द होना, अच्छी तरह से सुनने के लिए सिर को एक एक ओर से दूसरी और से दूसरी और घुमाना आदि। 

बोलने से संबंधित भाषा दोष (Language Disorders Related with Speaking) 

कई बार श्रवण दोष युक्त बालक या बालिका, में वाणी दोष भी उत्पन्न हो जाता है। वाणी दोष के अंतर्गत बोलते समय रुक-रुक कर बोलना, हकलाना, अस्पष्ट शब्दों का उच्चारण करना, बोलते समय वाणी में कठिनाई महसूस करना,अपने विचारों को स्पष्ट रूप से किसी के सामने ना रख पाना आदि शामिल है। जिसके कारण सामाजिक रूप से बच्चा अपने आप को को अपने आप को से बच्चा अपने आप को को अलग-थलग समझने लगता है, और हीनता का शिकार हो जाता है जिसके कारण उसकी अधिगम क्षमता (Learning ability) भी प्रभावित होती है। 

अफेजिया या डिस्फेसिया (Aphasia Or Dysphasia) - 

मौखिक रूप से सीखने एवं भाषा संबंधी अक्षमता के लिए मनोविज्ञान की भाषा में अफेजिया या डिस्फेसिया शब्द का उपयोग किया जाता है। इसे आगे के पढ़ने और लिखने संबंधी भाषा दोषों के बारे में के बारे में हम अगले आर्टिकल में चर्चा करेंगे। 

पढ़ने से संबंधित भाषा दोष (Language Disorder related with Reading) 

"तारे ज़मीन पर फिल्म" का छोटा सा बच्चा "ईशान अवस्थी" तो आपको याद ही होगा। वह पढ़ने संबंधी जिस संबंधी जिस विकार से पीड़ित था, उसे डिस्लेक्सिया (Dyslexia) कहा जाता है, इस विकार के कारण बच्चों को पढ़ने में कठिनाई होती है क्योंकि वह कई अक्षर व शब्दों में अंतर नहीं कर पाते। जैसे उन्हें b की जगह d दिखाई देता है। was की जगह saw दिखाई देता है। 

अलेक्सिया(Alexia) - 

बच्चे के मस्तिष्क में किसी प्रकार की क्षति के कारण पढ़ने में अक्षमता को अलेक्सिया कहा जाता है। कई बार इसे शब्दअंधता या पाठय अंधता या विजुअल अफेसिया भी कहा जाता है। जो कि एक Acquired Dyslexia भी कहा जाता है। मध्य प्रदेश प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के इंपोर्टेंट नोट्स के लिए कृपया mp tet varg 3 notes in hindi पर क्लिक करें.
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