व्यवसायिक शिक्षकों को फिल्मी स्टाइल में धमकियां दी जा रही है- MP Employees News

Bhopal Samachar
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भोपाल
। लोक शिक्षण संचालनालय की अपर संचालक कामना आचार्य को इन सर्विस ट्रेनिंग की तारीख आगे बढ़ाने का निवेदन क्या कर दिया, मानो सबसे बड़ा गुनाह हो गया। तमाम आउट सोर्स कंपनियों के अधिकारी निवेदन करने वाले कर्मचारियों की तलाश कुछ इस तरीके से कर रही है जैसे साउथ इंडियन फिल्मों में माफिया के गुर्गे करते हैं। 

निवेदन करने वाले कर्मचारी को भुगतना पड़ेगा

कर्मचारियों के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप पर अपने पद की मर्यादा और सभ्य शब्दावली को भूलकर आउटसोर्स कंपनियों के अधिकारी खुद को फिल्मी डॉन की तरह प्रदर्शित कर रहे हैं। एक कंपनी के अधिकारी ने लिखा है 'आपके द्वारा किसी भी प्रकार का मेल इन सर्विस ट्रेक रुकवाने या आगे बढ़ाने के लिए किया गया है तो आप अपना रेजिग्नेशन तैयार रखें'। इस मैसेज पर दूसरा अधिकारी लिखता है 'if anybody found guilty then he/has to suffer. (हिंदी: अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे भुगतना पड़ेगा)। 

श्रम आयुक्त को संज्ञान लेना चाहिए 

सरकारी सिस्टम में आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्पष्ट है कि इस तरह के मैसेज लिखने वाले अधिकारी पद के योग्य नहीं है। अयोग्य अधिकारियों की नियुक्ति हो गई है। कर्मचारियों को बंधुआ मजदूर की तरह ट्रीट किया जा रहा है। अपनी समस्या बताना और निदान के लिए निवेदन करना भारत में किसी भी नागरिक का अधिकार है। यदि वह गलत अधिकारी के सामने हैं तो संबंधित अधिकारी का दायित्व है कि वह पीड़ित को सही अधिकारी के समक्ष जाने की सलाह दें। 

यदि लोक शिक्षण संचालनालय की अपर संचालक कामना आचार्य आउटसोर्स कर्मचारियों के निवेदन को सुनने का अधिकार नहीं रखतीं, तो उन्हें स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी। पहले उन्होंने कर्मचारी से रिजाइन करने के लिए कहा। अब आउट सोर्स कंपनियों के अधिकारी साउथ इंडियन फिल्मों के माफिया के गुर्गों की तरह उन कर्मचारियों की तलाश कर रहे हैं जिन्होंने डीपीआई की अपर संचालक को ईमेल करने का गुनाह कर दिया। 

कर्मचारियों ने ऐसा क्या लिखा था ई-मेल में

कर्मचारियों ने बड़ी ही विनम्रता के साथ सिर्फ इतना सा निवेदन किया था कि कोरोनावायरस तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए इन सर्विस ट्रेनिंग प्रोग्राम की तारीख आगे बढ़ा दी जाए या फिर ट्रेनिंग प्रोग्राम को ऑनलाइन कर दिया जाए। यह कोई मुद्दा ही नहीं था। कर्मचारियों ने मुर्दाबाद के नारे नहीं लगाए। सिर्फ अपना डर बताया था। वही डर जिसके कारण कानपुर में एक डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली और भोपाल में दुकानदार ने।  मध्यप्रदेश कर्मचारियों से संबंधित महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया MP karmchari news पर क्या करें.
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