नशे में धुत व्यक्ति उत्पात मचा रहा हो तो इस धारा के तहत FIR दर्ज कराएं - LEARN IPC SECTION 510

Bhopal Samachar
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भारत के कई राज्यों में शराब पीना दंडनीय अपराध नहीं है लेकिन शराब पीकर या किसी भी प्रकार का दूसरा नशा करके सार्वजनिक स्थान पर उपद्रव करना, शांति भंग करना, लोगों के सामान्य जनजीवन को प्रभावित करना भारतीय दंड संहिता के तहत दंडनीय अपराध माना गया है। ज्यादातर लोग इस तरह के शराबी/ नशा करने वाले लोगों को इग्नोर करते हैं परंतु आईपीसी में प्रावधान है कि इस तरह के लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई जानी चाहिए।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 510 की परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार का नशा करके किसी सार्वजनिक स्थान जैसे- सड़क, स्कूल, अस्पताल, रेल्वे स्टेशन, बस स्टैंड, मोहल्ला, कॉलोनी, मंदिर आदि स्थान पर उत्पात मचाता है या ऐसे स्थान पर अतिचार करता है जहाँ मद्ध-निषेध (नशा प्रतिबंधित) स्थान हो, तब ऐसा व्यक्ति उपर्युक्त धारा के अंतर्गत दोषी होगा।

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 510 के अंतर्गत दण्ड का प्रावधान:-

इस धारा के अपराध समझौता योग्य नहीं होते हैं यह असंज्ञेय एवं जमानतीय अपराध होता है, इनकी सुनवाई का अधिकार किसी भी मजिस्ट्रेट के पास होता है। सजा- इस अपराध के लिए 24 घण्टे का सादा कारावास या न्यूनतम 10 रुपये का जुर्माना या दोनो से दाण्डित किया जा सकता है।
(10 रु.का जुर्माना जो पहले के समय में बहुत होता था क्योंकि हमारी दण्ड संहिता का निर्माण 1860 में हुआ था न्यायालय इस जुर्माने को विवेकानुसार अधिक भी कर सकते हैं।)।  :- लेखक बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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