वेतन पाना कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार, रोका तो ब्याज अदा करना होगा: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

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Supreme Court decision regarding salary stop or Hold of employee

नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कर्मचारियों के वेतन के मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 और 300ए के तहत निर्धारित तारीख पर वेतन पाना कर्मचारी का अधिकार है। सरकार किसी भी स्थिति में कर्मचारी का वेतन नहीं रोक सकती। यदि रोक दिया है तो सरकार को रोके गए वेतन पर ब्याज अदा करना होगा।

कोरोना के नाम पर कर्मचारियों का वेतन और पेंशन नहीं दिया था

आंध्र प्रदेश सरकार ने कोरोना महामारी के कारण आए वित्तीय संकट को देखते हुए मार्च-अप्रैल 2020 में सरकारी कर्मचारियों का वेतन और पेंशन कुछ समय के लिए टाल दी थी। सरकार ने इस बारे में एक आदेश निकाला था। हालांकि बाद में अप्रैल में सरकार ने तीन विभागों चिकित्सा स्वास्थ्य, पुलिस और सफाई कर्मचारियों का पूरा वेतन बहाल कर दिया और 26 अप्रैल को पेंशनर्स की पूरी पेंशन भी बहाल कर दिया लेकिन इस बीच एक पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की। इसमें उन्होंने कहा कि वेतन और पेंशन पाने को कर्मचारी का अधिकार बताकर रोके गए वेतन और पेंशन के भुगतान की मांग की।

कर्मचारी को हर महीने की अंतिम तारीख पर वेतन मिलना चाहिए

हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका पर विस्तृत आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश फाइनेंसियल कोड के अनुच्छेद 72 के मुताबिक सरकारी कर्मचारियों को हर महीने की अंतिम तारीख पर वेतन मिलना चाहिए। कहा पेंशन भी सिर्फ तब रोकी जा सकती है जब कर्मचारी विभागीय जांच या न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर कदाचार का दोषी हो जो कि इस मामले में नहीं है।

संविधान के अनुच्छेद 21 और 300ए के तहत वेतन पाना कर्मचारी का मौलिक अधिकार

हाईकोर्ट ने कहा कि वेतन पाना व्यक्ति को संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन के अधिकार और अनुच्छेद 300ए में मिले संपत्ति के अधिकार में आता है। हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश सरकार को 12 फीसद ब्याज के साथ रोका गया वेतन और पेंशन अदा करने का आदेश दिया था। इस फैसले को आंध्र प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि राज्य सरकार ने सिर्फ ब्याज अदा करने के पहलू को ही चुनौती दी थी।

कर्मचारी के बकाया वेतन पर 12 प्रतिशत ब्याज के लिए तैयार नहीं थी सरकार

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन टाले जाने का फैसला कोरोना महामारी के कारण आये वित्तीय संकट के चलते लिया गया था। आदेश जारी होने के बाद जल्द है फ्रंट लाइन वर्कर का वेतन बहाल किया गया। राज्य सरकार ने यह कदम अच्छे इरादे से उठाया था। ऐसे में ब्याज अदा करने का आदेश ठीक नहीं है।

कर्मचारियों को बकाया वेतन पर 6 प्रतिशत ब्याज अदा कीजिए: सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और एमआर शाह की पीठ ने गत 8 फरवरी को आंध्र सरकार की अपील का निपटारा करते हुए कहा कि टाले गए वेतन और पेंशन की अदायगी के आदेश में कोई गलती नहीं है। नियम कानून के मुताबिक वेतन और पेंशन पाना सरकारी कर्मचारी का अधिकार है। हालांकि कोर्ट ने कहा कि ब्याज की दर 12 फीसद से घटाई जा सकती है।

कर्मचारियों के रोके गए वेतन मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला

कर्मचारियों के वकील का कहना था कि हाई कोर्ट ने कानून के खिलाफ काम करने पर सरकार पर 12 फीसद की दर से ब्याज लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों पर कहा कि ब्याज अदा करने को सरकार को दंडित किये जाने के रूप मे नहीं लिया जाना चाहिए। इस बात में कोई दोराय नहीं कि जिस सरकार ने वेतन और पेंशन के भुगतान में देरी की है उसे उचित दर से ब्याज देना चाहिए। कोर्ट ने राज्य सरकार को देरी से हुए भुगतान पर छह फीसद ब्याज देने का आदेश दिया है।

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