भोपाल, 6 दिसंबर 2025: 4 महीने पहले जिस महिला अधिकारी को अवैध शराब के कारोबार पर कंट्रोल करने और रेवेन्यू ग्रोथ के लिए मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में कलेक्टर द्वारा बेस्ट ऑफिसर का अवार्ड दिया गया था, आज उसी महिला अधिकारी को मुख्यमंत्री के निर्देश पर सस्पेंड कर दिया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया गया था।
पृष्ठभूमि: फ्लैशबैक
यह मामला नवंबर माह से जुड़ा है, जब देवास के शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी। आत्महत्या से पहले बनाए गए एक वीडियो में मकवाना ने देवास जिले की प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित पर साढ़े सात लाख रुपये महीने की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था। वीडियो में उन्होंने कहा था कि दीक्षित की ब्लैकमेलिंग और अवैध मांगों से तंग आकर वह यह कदम उठा रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद समाचार पत्रों में भी सुर्खियां बना, जिसने राज्य सरकार को तुरंत एक्शन लेने के लिए मजबूर कर दिया।
मौत के 27 दिन बाद वीडियो क्यों वायरल हुआ
सच क्या यह तो इन्वेस्टिगेशन के बाद सामने आ ही जाएगा लेकिन कुछ परिस्थितिजन्य प्रश्न उपस्थित हुए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न उत्तर यह है कि, स्वर्गीय दिनेश की मृत्यु के 27 दिन बाद वीडियो क्यों वायरल हुआ। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने अपलोड किया और उसको यह वीडियो कहां से मिला। 27 दिन तक इस वीडियो का क्या किया गया। प्रश्न इसलिए भी उपस्थित होता है क्योंकि महिला अधिकारी मंदाकिनी दीक्षित का कहना है कि इस वीडियो के माध्यम से उनको ब्लैकमेल किया जा रहा था। करोड़ों रुपए की मांग की गई थी। जब उन्होंने देने से इनकार कर दिया तो वीडियो वायरल किया गया।
वीडियो एडिट क्यों किया
स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है कि स्वर्गीय दिनेश ने यह वीडियो अपनी कार ड्राइव करते हुए बनाया है। वीडियो रिकॉर्डिंग के समय वह अपनी कार में अकेले दिखाई दे रहे हैं। जबकि जहां पर वीडियो कट हो रहा है, वहां स्वर्गीय दिनेश अपने वीडियो रिकॉर्डिंग को बंद करते हुए दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसका अर्थ हुआ के वीडियो को कट किया गया है रिकॉर्डिंग को बंद नहीं किया गया। शायद इसके बाद स्वर्गीय दिनेश ने कुछ और भी रिकॉर्ड किया था जिसे एडिट कर दिया गया है।
वीडियो सुसाइड के लिए बनाया था या दबाव के लिए?
— Bhopal Samachar (@BhopalSamachar) December 6, 2025एक व्यक्ति का निधन हो जाने के बाद इस तरह के प्रश्न करना उचित नहीं होता लेकिन जब एक व्यक्ति की मृत्यु के 27 दिन बाद उसका वीडियो वायरल किया जाए तो पूछना जरूरी हो जाता है कि स्वर्गीय श्री दिनेश मकवाना ने यह वीडियो आत्महत्या करने के लिए बनाया था या फिर मंदाकिनी दीक्षित पर दबाव बनाने के लिए। पुलिस को इन्वेस्टिगेशन करना चाहिए कि, स्वर्गीय दिनेश ने स्वयं जहर का सेवन किया या फिर इस वीडियो के बन जाने के बाद किसी ने साजिश के तहत उनको जहर दे दिया?
अवार्ड देने से पहले जांच नहीं करते क्या
मंदाकिनी दीक्षित को 15 अगस्त 2025 को बेस्ट ऑफिसर का अवार्ड दिया गया था। इसमें बताया गया था कि उन्होंने शराब माफिया के खिलाफ प्रभावशाली कार्रवाई की और डिपार्टमेंट की रेवेन्यू ग्रोथ के लिए बड़ा काम किया। ईमानदारी और वफादारी का अवार्ड देने के चार महीने बाद बेईमानी के आरोप में मंदाकिनी दीक्षित को सस्पेंड कर दिया गया। शायद देवास का शराब माफिया भी यही चाहता था। कौन जीता कौन हारा, यह तो पॉलिटिक्स का सब्जेक्ट है लेकिन एक सिंपल क्वेश्चन है, किसी अधिकारी का अवार्ड देने से पहले उसकी जांच नहीं करते क्या?

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