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थाटीपुर कर्मचारियों को मकान खाली करने के नोटिस, क्रॉस लगाकर लिख दिया 'तोड़ना है' - GWALIOR NEWS

ग्वालियर।
ठाटीपुर स्थित बैरक में रहने वाले कर्मचारियों को एजी ऑफिस के शास्त्री नगर में शिफ्ट किया जाएगा। ठाटीपुर बैरक में रहने वाले कर्मचारियों को दो महीने में मकान खाली करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं और मकानों पर क्रॉस लगाकर टूटना है लिख दिया गया है। इसके बाद से ही ठाटीपुर में रहने वाले कर्मचारियों ने हडक़ंप मचा हुआ है।

ठाटीपुर बैरक में मकानों को तोडऩे की प्रक्रिया हाउसिंग बोर्ड ने शुरू कर दी है। बैरक क्वार्टर के अलावा ए, बी और सी-ब्लॉक के मकानों के बाहर मकान तोडऩे के निशान भी लगा दिए हैं। इन मकानों में कई ऐसे परिवार भी निवास करते हैं, जिनके परिजन सालों पहले रिटायर हो चुके हैं। लेकिन उन्होंने अभी तक मकानों से कब्जा नहीं छोड़ा है। इन मकानों में रहने वाले कर्मचारियों को शास्त्री नगर और साडा में शिफ्ट किया जाएगा। एजी ऑफिस के कुछ विभाग भोपाल शिफ्ट होने के बाद यहां पर मकान खाली पड़े हुए हैं।

साडा जाने का विरोध कर रहे हैं कर्मचारी

सरकारी क्वार्टरों में रहने वाले कर्मचारी तिघरा स्थित साडा जाने का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि साडा में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। यहां तक कि बच्चों के लिए स्कूल तक नहीं हैं। ऐसे में वहां रहने में कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

उचित स्थान पर रहने की हो व्यवस्था

उचित स्थान पर रहने की व्यवस्था करने के लिए कर्मचारी बीते दिनों राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिले। कर्मचारियों ने सिंधिया से कहा कि कॉलोनी में बड़ी संख्या में फलदार वृक्ष भी हैं। कर्मचारियों ने मांग की कि उन्हें ठाटीपुर में ही कहीं रहने की जगह मिले। वहीं भाजपा नेता वीरेन्द्र सिंह भी कर्मचारियों के साथ श्री सिंधिया से मिले। इस अवसर पर यूसुफ खान जगदीश सिंह, कौशलेन्द्र तोमर, मुकेश तोमर, महेन्द्र सिंह भदौरिया, सीताराम पाल, दीपक श्रीवास्तव, बसंत पाठक, कमल प्रजापति, पवन जाटव, पिंकू तोमर, अभय खरे आदि उपस्थित थे।

किराए पर मकान तलाश रहे हैं कर्मचारी

ठाटीपुर में रहने वाले कर्मचारी अब साडा में रहने की बजाय अब किराए के मकान तलाश करने में लग गए हैं। यहां पर रहने वाले कर्मचारियों ने बताया कि साडा में रहने से अच्छा है कि किराए के मकान में ही रहा जाए। साडा में रहने से बच्चों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। 

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