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क्या आपको सुरक्षा के लिए दूसरे पर हमला करने का हक है, पढिए कानून क्या कहता है / ASK IPC

Can i do violence or attack for my safety (Right to self defense)

वैसे तो भारत के लोकतंत्र में हिंसा का कोई स्थान नहीं है परंतु यदि कोई व्यक्ति आप पर हमला करता है और उस हमले को रोकने या उससे बचने का कोई भी विकल्प उपलब्ध नहीं है तो भारतीय दंड संहिता आपको यह अनुमति देती है कि आप हमलावर को रोकने के लिए बल प्रयोग करें। हमलावर को नियंत्रित करने की कोशिश में यदि हमलावर की मृत्यु भी हो जाती है तब भी भारत का कानून आपको हत्यारा मानकर दंडित नहीं करेगा। पढ़िए IPC कि वह धारा जिसके बारे में जानना भारत के हर नागरिक के लिए सबसे जरूरी है, क्योंकि यदि आम नागरिक अपने इस अधिकार के विषय में जान गया तो समाज से आदतन अपराधियों की संख्या कम होते देर नहीं लगेगी।

प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार / आत्मरक्षा का अधिकार / (Right of Private Defence)

प्राइवेट प्रतिरक्षा मतलब निजी सुरक्षा का अधिकार का अधिकार भारतीय दण्ड संहिता में जोड़ने का उद्देश्य यह है कि सरकार या पुलिस प्रशासन सभी जगह लोगों की सहायता नहीं कर सकती है। इसलिए लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी या रक्षा उनको स्वयं करनी है। व्यक्ति उतनी ही शक्ति का प्रयोग किसी सामने वाले पर कर सकता है जितनी ताकत का इस्तेमाल उस पर किया जा रहा है। 

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 96 की परिभाषा:-

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 96 सिर्फ निजी या प्राइवेट सुरक्षा के अधिकारो एवं नियमों की बात करती है। जैसे कि धारा 96 के अनुसार अगर कोई व्यक्ति आप पर अचानक जानलेवा हमला करता है तब आप हमला करने वाले उस व्यक्ति पर उतना ही हमला करने का अधिकार है, जितनी शक्ति (ताकत) का इस्तेमाल वो आप पर कर रहा है। अगर उतनी शक्ति (ताकत) के कारण कोई व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तब यह  अपराध नहीं होगा। 

नियम के अनुसार आप पर कोई व्यक्ति अचानक हमला करता है तब आप अपनी रक्षा के लिए उस व्यक्ति रोक सकते हैं। अगर आपकी निजी संपत्ति या निजी कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहा है तब भी आप उस व्यक्ति को नुकसान करने से रोक सकते हैं। ओर उतने ही बल का प्रयोग कर सकते हैं जितने बल का प्रयोग नुकसान पहुंचने वाला व्यक्ति आप पर कर रहा है।

*उधारानुसार:-* मुन्ना नामक व्यक्ति मोहन पर अचानक हमला करता है, यह हमला जानलेवा होता है। मोहन भी मुन्ना को देख कर उतनी ही शक्ति (ताकत) से वार करता है लेकिन मुन्ना को मोहन द्वारा किया गया वार लग जाता है, और मुन्ना की मृत्यु हो जाती है। यहाँ पर मोहन द्वारा की गई हत्या अपराध नहीं होगी क्योंकि मोहन ने अपनी निजी सुरक्षा के लिए मुन्ना पर हमला किया था।
बी. आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665 | (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

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