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भारत में मालगाड़ी भी 120 की स्पीड से चलेगी, जानिए WAG-12 इंजन के बारे में खास बातें

अजयकुमार निगम। भारतीय रेलवे द्वारा 12000-हार्सपावर के पहले, प्राइमा T8 इलेक्ट्रिक इंजन को 19 मई 2020 से सर्विस में उतार दिया गया हैए जो 120 किमी/ घंटा की अधिकतम गति पर 6000 टन का भार खींचने में सक्षम है। 

नया इलेक्ट्रिक इंजन एलस्टॉम ने बनाया है जिसका नाम है WAG-12

एलस्टॉम द्वारा निर्मित और रेलवे मंत्रालय और रेलवे सुरक्षा आयुक्त/ आरडीएसओ के द्वारा प्रमाणित, इलेक्ट्रिक इंजन - जिसे यहाँ WAG-12 नाम से जाना जाता है - भारतीय रेल पर चलने वाला सबसे शक्तिशाली लोकोमोटिव है। 2015 में किये गए अनुबंध के अनुसार एल्सटॉम कंपनी भारतीय रेलवे के लिए ऐसे 800 इंजनों का निर्माण करेगी।

इलेक्ट्रिक इंजन WAG-12 अधिकतम कितनी स्पीड से और कितना वजन खींच सकता है

देश में मॉल भाड़े में क्रांति लाने वाले इस ई-लोको से भारी मालवाहक गाड़ियों की तेज और सुरक्षित आवाजाही संभव हो सकेगी, जो 120 किमी/ घंटा की अधिकतम गति पर 6000 टन का भार खींचने में सक्षम है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पर चलाने की योजना के साथ, ये भारत में मालगाड़ियों की औसत गति में लगभग 25 किमी/ घंटा की वृद्धि करेंगे। इंसुलेटेड गेट बाइपोलर ट्रांजिस्टर (IGBT) प्रोपल्शन तकनीक से लैस,ये ई-लोको रिजनरेटिव ब्रेकिंग के उपयोग की बदौलत ऊर्जा की खपत में भी अच्छी-खासी बचत करेगा।

इलेक्ट्रिक इंजन WAG-12 का निर्माण भारत में कहां शुरू हुआ

मेक-इन-इंडिया जनादेश के अनुरूप, सभी 800 प्राइमा इंजन स्थानीय स्तर पर भारत में ही निर्मित किए जा रहे हैं। बेंगलुरु के एल्सटॉम इंजीनियरिंग सेंटर में डिज़ाइन किया गया, प्राइमा टी 8 WAG -12 भारत के सबसे बड़े एकीकृत ग्रीनफील्ड विनिर्माण सुविधाओं में से एक बिहार के मधेपुरा में बनाया जा रहा है। 250 एकड़ में फैले, प्रति वर्ष 120 इंजनों की उत्पादन क्षमता के साथ, मधेपुरा साइट को सुरक्षा और गुणवत्ता के अंतरराष्ट्रीय मानकों के लिए बनाया गया है। सहारनपुर और नागपुर में दो अति-आधुनिक रखरखाव डिपो लोकोमोटिव की उच्च सेवा उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे। सहारनपुर डिपो पहले से ही चालू है और नागपुर में एक निर्माणाधीन है। नवीनतम सुविधाओं से लैस, ये डिपो भारत के सबसे उन्नत माल इंजनों को कम लागत पर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

भारतीय रेल की सबसे बड़ी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) परियोजना कौन सी है

भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) परियोजना के हिस्से के रूप में, 2015 में रेल मंत्रालय और अल्स्टॉम ने €3.5 बिलियन (INR 25,000 करोड़) के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए और परियोजना के लिए एक संयुक्त उद्यम बनाया गया। जिसके अंतर्गत माल ढुलाई सेवा के लिए 800 डबल-सेक्शन, 12000-हॉर्सपावर के इलेक्ट्रिक इंजनों के निर्माण और 11 साल की अवधि के लिए संबंधित रखरखाव के लिए अनुबंध की अनुमति दी गई है। इस दायरे में ई-लोको के निर्माण के लिए मधेपुरा (बिहार) में एक विनिर्माण संयंत्र की स्थापना और दो रखरखाव डिपो सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) और नागपुर (महाराष्ट्र) में, भी शामिल थी। भारत के दृष्टिकोण का एक वास्तविक अवतार ये परियोजना देश में 10,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी (मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में)।
लेखक श्री अजय कुमार निगम गोविंद बल्लभ पंत इंजीनियरिंग कॉलेज, दिल्ली से ग्रेजुएट एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं। भारतीय रेल के लिए मुंबई में लोकोमोटिव (ट्रेन के पायलट) के पद पर कार्यरत हैं। 

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