Bhopal Samachar karmchari: अतिथि विद्वानों को परमानेंट करने की प्रक्रिया का पहला चरण शुरू

भोपाल, 3 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेसर्स के रिक्त पदों के विरुद्ध पिछले दो दशकों से (20 वर्षों से) सेवा देने वाले अतिथि विद्वानों के आने वाले समय में दिन बहुरेंगे। दो वर्ष की उच्च शिक्षा की उपलब्धि को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए, इस बात के स्पष्ट संकेत दिए थे। 2 जनवरी 2026 को इस दिशा में पहला कदम बढ़ाया गया है। आयुक्त उच्च शिक्षा संचालनालय द्वारा अतिथि विद्वानों का भविष्य सुरक्षित बनाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। मोतीलाल साइंस कॉलेज भोपाल वाले डॉ अनिल राजपूत समिति के संयोजक हैं और डॉ अजय कुमार भारद्वाज एवं डॉ एच के गर्ग को सदस्य नियुक्त किया गया है। यह समिति दिनांक 6 और 7 जनवरी को अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगी। 

मध्य प्रदेश में 3700 अतिथि विद्वानों को परमानेंट किया जाएगा

उच्च शिक्षा मंत्री परमार ने पत्रकारों से पूछे गए सवाल पर कहा कि, बहुत जल्द अतिथि विद्वानों का स्थाईत्व करने जा रहे हैं। हरियाणा सरकार के ऐतिहासिक निर्णय को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार भी उत्तम एवं श्रेष्ठ निर्णय ले रही है। अभी लगभग 4500 अतिथि विद्वान कार्यरत हैं जिनमें से लगभग 3700 यूजीसी योग्यता पूरी करते हैं और पढ़ाने का लम्बा अनुभव रखते हैं। जैसा कि विदित है, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज इन्हीं विद्वानों को महापंचायत में उच्च शिक्षा विभाग की शान एवं रीढ़ बोल चुके हैं। अतिथि विद्वान लंबे समय से अपने स्थाईत्व के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं।

अतिथि विद्वानों के लिए हरियाणा सरकार की पॉलिसी क्या है

रिक्त पदों के विरुद्ध पिछले पांच वर्षों से जो अतिथि विद्वान सेवा कर रहे थे तथा जो यूजीसी योग्यता धारी थे, उनके लिए हरियाणा की भाजपा सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए न्यूनतम वेतनमान 57,700 पर रिटायरमेंट उम्र तक स्थाईत्व प्रदान किया है तथा वर्ष में जनवरी एवं जुलाई के प्रथम दिन से प्रभावी महंगाई भत्ते की प्रतिशतता के अनुसार वृद्धि का प्रावधान किया है। इसी को लेकर मध्य प्रदेश के अतिथि विद्वानों ने अपनी बात सरकार से रखी और तर्क दिया कि हम तो पिछले 25 वर्षों से अनिश्चित भविष्य और अल्प मानदेय पर सेवा कर रहे हैं। वर्तमान में अतिथि विद्वानों की संख्या लगभग 4500 है जिनमें से लगभग 3600 अतिथि विद्वान नेट/सेट/पीएचडी हैं। मध्य प्रदेश में लगभग 2700 अतिथि विद्वान ऐसे हैं जिनको 5 वर्ष का अनुभव है।

डॉ. देवराज सिंह, अध्यक्ष, अतिथि विद्वान महासंघ ने कहा:
महाविद्यालयीन अतिथि विद्वान महासंघ माननीय उच्च शिक्षा मंत्री जी के बयान का स्वागत करता है तथा आशा करता है कि अतिथि विद्वानों को स्थाईत्व प्राप्त होगा।

डॉ. आशीष पाण्डेय, मीडिया प्रभारी, महासंघ ने कहा
माननीय मुख्यमंत्री जी, उपमुख्यमंत्री जी, उच्च शिक्षा मंत्री जी एवं विभागीय शीर्ष अधिकारियों का सादर आभार कि उन्होंने वर्षों से शोषित अतिथि विद्वानों का पुनर्वास करने का निर्णय ले लिया है।

डॉ. अविनाश मिश्रा, उपाध्यक्ष, महासंघ ने कहा
माननीय मंत्री जी की घोषणा से 25 वर्षों का वनवास खत्म होगा, फिक्स मासिक वेतन मिलेगा तथा फॉलन आउट से निजात मिलेगी और हरियाणा सरकार से बेहतर नीति सरकार बनाएंगी, ऐसी पूरी उम्मीद है। माननीय मंत्री जी का सादर आभार।
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