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दिग्विजय सिंह और कमलनाथ फ्लोर टेस्ट टालने क्या-क्या ​हथकंडे अपनाएंगे | MP NEWS

भोपाल। कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी सरकार के कुलगुरु दिग्विजय सिंह किसी भी स्थिति में विश्वास मत को टालना चाहते हैं। इसके लिए वह हर संभव कोशिश करेंगे। विधानसभा के अंदर उपद्रव, यहां तक कि हाथापाई भी हो सकती है। सूत्रों का कहना है कि मंत्री जीतू पटवारी और उनके साथ ही विधायकों की टीम को एक खास टारगेट पर लगाया गया है। कानूनी दांवपेच के अलावा राजनीति के सभी हथकंडे अपनाने की तैयारी कर ली गई है।

विधानसभा अध्यक्ष का बयान जो कल की रणनीति का संकेत दे रहा है

इस बीच मध्य प्रदेश विधानसभा के स्पीकर नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने कहा है कि उन्हें बागी ​विधायकों की चिंता है। स्पीकर एनपी प्रजापति ने कहा, 'मैं विधायकों का संरक्षक हूं। मैं चिंतित हूं। माननीय सदस्यों के साथ क्या हो रहा है? लोकतंत्र को लेकर चिंतित हूं। हमारे प्रदेश में भी कोरोना वायरस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता है। पक्ष और विपक्ष के बीच मैं निष्पक्ष हूं। कल फ्लोर टेस्ट होगा या नहीं, ये कल ही तय किया जाएगा। सत्र में फ्लोर टेस्ट को लेकर राज्यपाल आदेश दे सकते हैं या नहीं इसकी व्याख्या मैं कल ही करूंगा।'

राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन स्थगित किया जा सकता है

मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस की कमलनाथ सरकार की कैबिनेट मीटिंग संपन्न हो चुकी है। इस मीटिंग में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ जो ब्रेकिंग न्यूज़ बने। बताया जा रहा है कि एक रणनीति बनी है। राज्यपाल महोदय के निर्देशों को दरकिनार करते हुए विधानसभा अध्यक्ष अभिभाषण के तत्काल बाद सदन को कोरोना वायरस के नाम पर स्थगित कर देंगे। इस तरह मुख्यमंत्री कमलनाथ को अपनी कुर्सी बचाने के लिए थोड़ा समय और मिल जाएगा।

मध्य प्रदेश पुलिस नहीं तो कोरोनावायरस टेस्ट के नाम पर चांस लिया जाएगा 

कमलनाथ सरकार ने पहले रणनीति बनाई थी कि बेंगलुरु से आने वाले बागी विधायकों को मध्य प्रदेश पुलिस की सुरक्षा के नाम पर भीड़ से अलग कर दिया जाएगा। ताकि विधायकों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक चांस मिल सके। अब जबकि CRPF सुरक्षा की बात सामने आ गई है तो कोरोना वायरस टेस्ट के नाम पर बागी विधायकों को भीड़ से अलग किया जाएगा। मुख्यमंत्री कमलनाथ चाहते हैं कि केवल एक बार बागी विधायकों के सामने उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिल जाए। मैसेज पहुंचाने वाला कोई भी हो, किसी भी तरह से मैसेज पहुंच जाए।

सदन की कार्रवाई आपातकाल में भी चलती है, लोकसभा भी तो चल रही है: भाजपा

MP की राजनीतिक स्थिति पर BJP नेता गोपाल भार्गव का कहना है कि मैं पूछना चाहता हूं क्या संसद या किसी विधानसभा की कार्रवाई कोरोना या किसी चीज़ के कारण रोकी है? ये सिर्फ अल्पमत सरकार को कुछ समय के लिए बचाने की कोशिश है परन्तु अब इस सरकार को कोई नहीं बचा सकता क्योंकि वोटों में बहुत लंबा अंतर है। 

16 मार्च को यदि फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ तो क्या होगा 

कांग्रेस पार्टी की कमलनाथ सरकार को हर कदम पर खतरा बना हुआ है। यदि किसी भी प्रकार का हथकंडा अपनाकर विधानसभा में विश्वास मत पर वोटिंग को टालने की कोशिश की गई तो राज्यपाल के पास कार्यवाही करने का अधिकार होगा। इसके अलावा बात सुप्रीम कोर्ट तक भी जा सकती है। कुल मिलाकर ऐसी स्थिति में यदि सरकार गिरी तो बेहद अपमानजनक स्थिति होगी।


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