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मध्यप्रदेश हॉर्स ट्रेडिंग: प्लान लीक कैसे हुआ जब सब कुछ योजनाबद्ध था | MP NEWS

भोपाल। कांग्रेस दावा कर रही है कि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस एवं कमलनाथ सरकार के साथ ही विधायकों को एक साजिश के तहत दिल्ली में एकत्रित किया था। विधायकों के बयान कुछ भी हो लेकिन संदेह को बल इसलिए भी मिलता है कि ज्यादातर विधायक एक ही होटल में थे यानी जो कुछ भी चल रहा था एक प्लान के तहत चल रहा था। आइए जानते हैं जब सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था तो फिर यह खबर लीक कैसे हो गई।

एक विधायक के गण मैंने खबर लीक कर दी थी 

बताया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी की प्लानिंग के अनुसार कुल 12 विधायकों को दिल्ली में आना था। इनमें से 11 दिल्ली पहुंच गए थे। एक विधायक के गनमैन ने दिल्ली रवाना होने से पहले एक फोन कॉल किया था। इसी फोन कॉल के माध्यम से ही कांग्रेस को पता चला कि भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में विधायकों का एकत्रीकरण कर रही है। 

दिल्ली में विधायक क्यों जमा हुए थे, क्या होने वाला था 

कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय एवं दूसरी पार्टियों के विधायकों के साथ कुछ नाराज कांग्रेस विधायक दिल्ली में जमा हुए थे। इनकी मुलाकात बुधवार को भाजपा हाईकमान से होने वाली थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि अमित शाह से होने वाली थी। इस मीटिंग के बाद ही फाइनल होता है कि आखिर क्या करना है। राज्यसभा में वोटिंग का मुद्दा तो क्लियर था इसके अलावा कमलनाथ सरकार को गिराना है या नहीं इसका फैसला बाकी था। 

यदि बातचीत सफल हो जाती तो क्या होता है 

यदि बातचीत सफल हो जाती है तो कुछ भी हो सकता था। 11 विधायक यदि एक साथ कमलनाथ सरकार से बाहर हो जाती है तो सरकार का गिर जाती और यह सब कुछ राज्यसभा चुनाव से पहले हो जाता। कमलनाथ सरकार से टूटने वाले विधायकों को दिल्ली में दो जगह और बेंगलुरु में एक जगह रुकना था। कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को मप्र के विधायकों को संभालने का जिम्मा सौंपा गया था। बेंगलुरु के प्रेस्टीज पालम मेडोज में तीन कांग्रेसी और एक निर्दलीय विधायक को रखा गया है।

हाईकमान शिवराज सिंह से नाराज 

विधायकों से बातचीत भले ही नरोत्तम मिश्रा ने किया लेकिन हाईकमान से बात शिवराज सिंह चौहान ने की थी। भाजपा हाईकमान ने ऑपरेशन लोटस में यह शर्त रखी थी कि यह फेल नहीं होना चाहिए, लेकिन कांग्रेस के सक्रिय होने के बाद ऑपरेशन लोटस फेल हो गया। ऑपरेशन फेल होने के बाद नरोत्तम समेत अन्य नेता तो दिल्ली से रवाना हो गए, लेकिन शिवराज सिंह को भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दिल्ली बुला लिया। 


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