आदिवासियों के महुआ देव को अधिकारियों ने JCB से उखाड़ दिया | MP NEWS
       
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आदिवासियों के महुआ देव को अधिकारियों ने JCB से उखाड़ दिया | MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश के बैतूल एवं आसपास के इलाकों में आस्था का केंद्र बन चुके महुआ के पेड़ को JCB की मदद से उखाड़ कर फेंक दिया गया। यह करतूत किसने की, नाम छुपाने की कोशिश की जा रही है। कलेक्टर जांच की बात कर रहे हैं। यहां बताना जरूरी है कि महुआ के पेड़ की पूजा का बैतूल जिला प्रशासन द्वारा लगातार विरोध किया जा रहा था। अब आदिवासियों के साथ पर्यावरण एक्टिविस्ट भी भड़क गए हैं।

प्रशासन पेड़ की पूजा को मान रहा था अंधविश्वास


बैतूल के भैंसदेही के पास सीता ढाना में ग्रामीण बीते एक पखवाड़े से महुआ के एक पेड़ की पूजा कर रहे थे। आदिवासियों में मान्यता थी कि इस महुआ के पेड़ में देवता का निवास है। इसकी पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है। हजारों लोग पेड़ को देवता समझ कर पूजा कर रहे थे लेकिन जिला प्रशासन को महुआ के पेड़ की पूजा पसंद नहीं थी। ग्रामीणों को पेड़ की पूजा करने से रोकने के लिए भैंसदेही एसडीएम राधेश्याम बघेल और तहसील दार देवकुमार भी पहुंचे थे लेकिन ग्रामीणों ने महुआ के पेड़ की पूजा बंद नहीं की। अब इस पेड़ को जेसीबी मशीन की मदद से जड़ से ही उखड़वा दिया गया है। 

पर्यावरण एक्टिविस्ट भी पेड़ को उखाड़ने से गुस्से में

धामनगांव पंचायत के तहत आने वाले इस गांव में यह महुआ का पेड़ किसान विश्वनाथ अमरगढ़े के खेत में लगा हुआ था। इस मामले के सामने आने के बाद आदिवासी संगठन आग बबूला है, जबकि पर्यावरण प्रेमी भी इस कार्रवाई के खिलाफ मैदान में आ गए हैं। गोंडवाना महासभा ने तो इसे आदिवासी समाज की भावनाओं पर कुठाराघात बताते हुए आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। पर्यावरण प्रेमी भी इसे लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

आदिवासी संगठन दे रहे विरोध प्रदर्शन की चेतावनी

इन संगठनों की मानें तो एक महुआ का पेड़ न केवल आक्सीजन देता है, बल्कि यह आदिवासियों की आय का भी जरिया होता है। इससे किसान को 8 से 10 हजार रुपये सालाना तक की आय होती है। इसे पेड़ को जड़ से उखाड़ा जाना निराशाजनक है। कलेक्टर ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। 

मैंने तो पेड़ काटने का आवेदन दिया था उखाड़ने का नहीं: किसान

किसान विश्वनाथ जिसकी खेत में महुआ का पेड़ लगा हुआ था, का कहना है कि उसने जिला प्रशासन को एक आवेदन दिया था। उसके खेत में चने की फसल लगी हुई थी। महुआ की पूजा करने आने वाले लोग उसकी फसल को नुकसान पहुंचा रहे थे। कुछ समय के लिए यह पूजा रुक जाए इसलिए उसने प्रशासन को आवेदन दिया था लेकिन अधिकारियों ने JCB लाकर पूरा पेड़ ही उखाड़ कर फेंक दिया।