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जींस में छोटी जेब क्यों होती है, कोई बड़ा कारण है या बस डिजाइन | GK IN HINDI

कपड़ों में डेनिम जींस को किसी इंट्रोडक्शन की जरूरत नहीं है। सब जानते हैं कि खदानों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए जींस का निर्माण किया गया था। 1873 में बनी डेनिम जींस आज दुनिया भर में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। डेनिम जींस फैशन बन चुकी है परंतु क्या आप जानते हैं डेनिम जींस में आगे पीछे चार बड़े पॉकेट होने के बावजूद एक छोटा जेब क्यों होता है। क्या इसके पीछे कोई बड़ा कारण है या फिर सिर्फ कुछ अलग डिजाइन बनाने के लिए बड़े पॉकेट के अंदर छोटा जेब बना दिया गया है। आइए जानते हैं: 

छोटे पॉकेट (जेब) का राज़ खुद लिवाइस ने बताया

व्यापक तिवारी भिलाई, छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं एवं शौकिया तौर पर ब्लॉगिंग करते हैं। श्री तिवारी बताते हैं कि 1873 में दुनिया की पहली डेनिम जीन्स बनाने वाली कंपनी लिवाइस स्ट्रॉस थी। इस छोटे पॉकेट (जेब) का राज़ खुद लिवाइस ने ही बताया।

जीन्स का आविष्कार हुआ क्यों था

सबसे पहले यह जानिये कि आखिर जीन्स का आविष्कार हुआ क्यों था। असल में जीन्स 'मजदूरों' के लिए बनाये गए थे। चूंकि ये कपडे काफी मज़बूत होते थे, यह मज़दूरी के काम में अधिक समय तक साथ देकर उपयोगी साबित होते थे। लेकिन धीरे-धीरे 20वीं सदी के अंत तक ये एक स्टाइल स्टेटमेंट बन गए।

काऊबॉय की घड़ियों के लिए छोटा जेब बनाया था


अब इस घड़ी को देखिये। यह है जंजीर वाली पॉकेट वाच। उस ज़माने में अमेरिकी काऊबॉय इस प्रकार की घड़ियों के शौक़ीन थे। वो अक्सर काम पर ये घड़ियाँ लेकर चलते थे। लिवाइस स्ट्रॉस कंपनी ने अपने एक ब्लॉग में बताया कि ख़ास उन काऊबॉय की घड़ियों को जगह देने और सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह छोटी पॉकेट बनायी गयीं।

आजकल इसे इसे कॉइन पॉकेट, टिकट पॉकेट या ऐसा ही कोई नाम देते हैं


जैसे-जैसे लिवाइस स्ट्रॉस कंपनी मशहूर हुई, सारे जीन्स निर्माताओं ने बिना कारण जाने ही ये छोटा जेब बनाना शुरू कर दिया। आजकल काफी कम्पनियाँ इसे कॉइन पॉकेट, टिकट पॉकेट, इत्यादि नाम दे रही हैं लकिन इसका असल में वो घड़ी रखने वाली पॉकेट है।
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