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बचिए, कोरोना से ! | EDITORIAL by Rakesh Dubey

दुनिया भर में कोरोना वायरस ने हाहाकार मचा रखा है और १२५  से ज्यादा देशों में इस वायरस का प्रकोप दिख रहा है। दुनियाभर में  २०६२७ से ज्यादा मामले सामने आए हैं। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस वायरस के खतरे को देखते हुए  देश में प्रचलित एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी में इसके इलाज सुझाये हैं |ये जानकारी पत्र सूचना कार्यालय [पी आई बी ] की वेब साईट पर देखी जा सकती है |

देश के विभिन्न हिस्सों में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ना चिंताजनक अवश्य है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। यदि हवाई अड्डों पर पर्याप्त सतर्कता बरती जाती तो शायद कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की पहचान समय रहते हो जाती। यह सतर्कता क्यों नहीं बरती जा सकी, इसकी तह में जाने और साथ ही ऐसी व्यवस्था करने की जरूरत है कि कम से कम अब उन सभी लोगों की जांच अवश्य हो, जो विदेश से भारत आ रहे हैं।

चूंकि कोरोना वायरस दुनिया के कई हिस्सों में फैल हो चुका है और मौजूदा माहौल में कोई भी उससे संक्रमित हो सकता है, इसलिए कहीं अधिक सावधानी का परिचय देना समय की मांग है। विदेश से आने वालों के लिए भी यह आवश्यक है कि वे हवाई अड्डों पर जरूरी जांच-पड़ताल में सहयोग करें। इसी के साथ आम लोगों में यह जागरूकता पैदा करने की भी जरूरत है कि जुकाम-खांसी से पीड़ित होने का मतलब कोरोना वायरस की चपेट में आना नहीं है और इस वायरस से संक्रमित लोगों का उपचार संभव है। केरल में इस वायरस से संक्रमित पाए गए लोग ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं। चीन में भी कोरोना वायरस से मुक्त होने वालों की संख्या बढ़ रही है।

यह वायरस सेहत के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के लिए और अधिक खतरा न बनने पाए। इसके लिए दुनिया को एकजुट होने की जरूरत है। कोरोना वायरस ने एक ऐसे समय सिर उठाया है, जब विश्व अर्थव्यवस्था पहले से ही सुस्ती का शिकार है।कोरोना वायरस के अंदेशे से अमेरिका से लेकर भारत तक के शेयर बाजारों के लड़खड़ाने के बीच यह खबर तनिक राहत देने वाली है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी विकास दर ४.७ प्रतिशत रही। दूसरी तिमाही में यह दर ४.५ प्रतिशत रही थी, जो बीते छह वर्षों में सबसे कम थी। हालांकि जीडीपी विकास दर में मामूली सुधार ही हुआ है, लेकिन यह इसलिए उल्लेखनीय है, क्योंकि कई एजेंसियों ने तीसरी तिमाही में विकास दर और कम होने का अनुमान लगाया था। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इसका मतलब है कि सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए जो तमाम उपाय किए, वे कारगर साबित हो रहे हैं। बावजूद इसके उसे सतर्क रहना होगा, क्योंकि एक तो विकास दर में वृद्धि मामूली ही रही और दूसरे, कोरोना वायरस का अंदेशा दुनिया के अन्य देशों की तरह भारत की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर डाल रहा है। तमाम भारतीय उद्योग कच्चे माल और उपकरणों के लिए चीन पर निर्भर हैं। इस निर्भरता को कम करने के बारे में विचार करने के साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या इस संकट में कोई अवसर भी छिपा है? जो अंतरराष्ट्रीय निवेशक चीन से मुंह मोड़ रहे हैं, उन्हें भारत आने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसी तरह भारतीय कंपनियों को दुनिया के उन बाजारों में पैठ बढ़ानी चाहिए, जहां चीनी उत्पाद छाए रहते हैं।

कोरोना वायरस का संक्रमण मानव स्वास्थ्य के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी गंभीर खतरा बनकर उभरा है, इसलिए सभी देशों को मिलकर उससे निपटने के प्रयासों को गति देनी चाहिए। कोशिश इसकी भी होनी चाहिए कि इस वायरस को निष्प्रभावी करने वाला टीका जल्द तैयार हो। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक सेहत के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतने के अलावा और कोई उपाय नहीं। यह सही समय है जब राज्य सरकारें अपने स्वास्थ्य तंत्र की समीक्षा के साथ यह सुनिश्चित करें कि कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की निगरानी और उपचार सही तरह से हो। केंद्र सरकार को भी हर हाल में यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि इलाज के लिए जरूरी दवाओं और उपकरणों की कमी न होने पाए। उचित होगा कि वह यह देखे कि उसके निर्देशों पर सही तरह अमल हो रहा है या नहीं?
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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