कमलनाथ के इस बयान के मायने क्या है "मैं शिवराज से नाराज नहीं होता, सिंधिया से क्यों होऊंगा" | MP NEWS
       
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कमलनाथ के इस बयान के मायने क्या है "मैं शिवराज से नाराज नहीं होता, सिंधिया से क्यों होऊंगा" | MP NEWS

भोपाल। ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के बीच चल रही तनातनी के दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ का दूसरा बयान सामने आया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ज्योतिरादित्य सिंधिया से नाराज हैं तो उन्होंने जवाब दिया "मैं शिवराज से नाराज नहीं होता, सिंधिया से क्यों होऊंगा"। इस जवाब से नए सवाल पैदा हो गए हैं। सवाल यह है कि शिवराज सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया सामान नहीं है फिर कमलनाथ ने यह बयान क्यों दिया। 

कमलनाथ के लिए क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा प्रिय शिवराज सिंह हैं 

बड़ा सवाल यही है। कोई भी व्यक्ति इस तरह के बयान में उस व्यक्ति का उल्लेख करता है जो संदर्भित व्यक्ति से ज्यादा प्रिय हो। सीएम कमलनाथ ने कहा कि "मैं शिवराज से नाराज नहीं होता, सिंधिया से क्यों होऊंगा"। इसका क्या तात्पर्य निकाला जाए जबकि आधिकारिक तौर पर शिवराज सिंह भाजपा के नेता हैं और सरकार के विरोधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के नेता है। उनके समर्थक विधायक कमलनाथ सरकार में मंत्री हैं। सवाल यह है कि क्या कमलनाथ के व्यक्तिगत रिश्ते इससे कुछ अलग है। क्या शिवराज सिंह चौहान उनके लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया से ज्यादा प्रिय हैं। 

शिवराज सिंह चौहान चुनाव हार गए लेकिन कमलनाथ पर हमलावर नहीं हुए

कमलनाथ और शिवराज सिंह की दोस्ती के चर्चे हमेशा से होते रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान जब मुख्यमंत्री थे तब उन पर आरोप लगे थे कि उन्होंने कमलनाथ के कहने पर कुछ कंपनियों को अपने पद का उपयोग करते हुए लाभ पहुंचाया। विधानसभा चुनाव के दौरान भी जबकि स्पष्ट हो गया था कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस के दो चेहरे हैं, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपना पूरा चुनाव अभियान ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ रखा। उनके बयानों में दिग्विजय सिंह होते थे परंतु कमलनाथ नहीं होते थे। शिवराज सिंह के हृदय में कमलनाथ के प्रति एक सॉफ्ट कॉर्नर हमेशा दिखाई देता है। कमलनाथ ने भी भाजपा शासनकाल में कभी भी शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। सोशल मीडिया पर दोनों की दोस्ती की कई फोटोग्राफी वायरल हुए हैं। भाजपा में एक आरोप तो यह भी लगता है कि यदि शिवराज सिंह चौहान विधानसभा चुनाव के आखिरी 3 दिनों में ढील नहीं छोड़ते तो मध्य प्रदेश में अभी भी भाजपा की सरकार होती। 

मुख्यमंत्री बनने के बाद भी कमलनाथ के दिल में शिवराज सिंह के लिए सॉफ्ट कॉर्नर है

शिवराज सिंह सरकार के खिलाफ काम करते हुए कांग्रेस को फायदा पहुंचाने वाले कई एक्टिविस्ट्स का आरोप है कि भ्रष्टाचार के जो आरोप विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने शिवराज सिंह सरकार पर लगाए थे उनमें से किसी भी ऐसे घोटाले की गंभीरता पूर्वक जांच नहीं की गई जिसमें शिवराज सिंह चौहान का नाम आता है। याद दिलाने की जरूरत नहीं की कांग्रेस पार्टी द्वारा चुनाव के दौरान जारी की गई घोटालों की लिस्ट में 50 से ज्यादा ऐसे घोटालों का जिक्र किया था जिसमें शिवराज सिंह चौहान और शिवराज सिंह चौहान के परिवार के लोग शामिल थे।