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भोपाल में लोकरंग 26 जनवरी से, 7 दिन चलेगी गणतंत्र की धूम | BHOPAL NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश शासन संस्कृति विभाग द्वारा  "लोकरंग" रवीन्द्र भवन परिसर, भोपाल में 26 जनवरी से आरंभ हो रहा है।  30 जनवरी, 2020  तक चलने वाले इस उत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रतिदिन सायं 7:00 बजे से होंगी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर जनजातीय और लोक प्रदर्शनकारी तथा रूपंकर कलाओं के समारोह "लोकरंग" का यह 35वाँ वर्ष है, लोकरंग में पारम्परिक कलाओं को मंच पर प्रदर्शन के आरंभ कराने से लेकर जनजातीय समुदायों की लोककथाओं पर आधारित विशेष नृत्य-नाट्य प्रस्तुतियों की नवप्रयोग धर्मी यात्रा की है। 

इस यात्रा में उत्सव का स्पष्ट उद्देश्य यह रहा है कि भारतीय लोकतंत्र के पर्व में जन की उत्साहिक भागीदारी को प्रमाणिक रूप से सुनिश्चित किया जाये| पांच दिवसीय इस सांस्कृतिक उत्सव समारोह में विषय आधारित समवेत सांस्कृतिक प्रस्तुतियॉं,समूह नृत्य प्रस्तुतियॉं, पारम्परिक जनजातीय और लोकनृत्य,गायन, विषय आधारित प्रदर्शनी बच्चों के लिए सृजनात्मक गतिविधियॉं तथा पारंपरिक शिल्पियों का शिल्प सृजन प्रदर्शन सहविक्रय और व्यंजन मेला आयोजित किया जाता है।  

लोकरंग समारोह में जनजातीय और लोक आख्यानों से विषय आधारित समवेत सांस्कृतिक नृत्य—नाट्य प्रस्तुति तैयार की जाती है। शुभारम्भ संध्या अवसर पर 26 जनवरी को गोण्ड आख्यान आधारित समवेत नृत्य—नाट्य "राजा पेमलशाह" में सूत्रधार हिन्दी फिल्म के अभिनेता श्री शहनबाज खान हैं।  प्रस्तुति का मंचन श्री रामचन्द्र सिंह,भोपाल के निर्देशन में होगी । लेखक हैं श्री नवल शुक्ल।

घूमर—
27 जनवरी को घूमर में मालवी परम्परा का समवेत नृत्य—गायन सुश्री प्रतिभा रघुवंशी,उज्जैन के निर्देशन में, भील जनजातीय भगोरिया नृत्य श्री प्रताप भील,धार के निर्देशन में,पुरलिया छाउ नृत्य श्री विश्वदेव महतो,रॉंची  (छत्तीसगढ़)  के निर्देशन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियॉं सायं 7 बजे होंगी।   

आदि शिल्पी—
28 जनवरी को आदि शिल्पी नृत्य—नाटिका श्री चन्द्रमाधव बारीक,भोपाल के निर्देशन में प्रस्तुति का मंचन सायं 7 बजे होगा।

धरोहर—
"धरोहर" में मध्यप्रदेश एवं अन्य राज्यों के जनजातीय एवं लोकनृत्यों का प्रदर्शन किया जाता है, "भारिया जनजातीय सैताम नृत्य" सुश्री अनसुइया तेलीराम भारती,छिंदवाड़ा के निर्देशन में, "गरबा,टिपणी एवं डांडिया रास" सुश्री ध्वनिसेवक बसावडा अहमदाबाद (गुजरात) के निर्देशन में 28 जनवरी को प्रस्तुतियां होंगी। 29 जनवरी को धरोहर में "कोरकू जनजातीय गदली एवं थापटी नृत्य" श्री मंशाराम,हरदा (मध्यप्रदेश)  के निर्देशन में, शंख ध्वनि नृत्य श्री राजेन्द्र महापात्र,उड़ीसा के निर्देशन में प्रस्तुतियॉं होंगी।

गणगौर—
निमाडी परम्परा का समवेत गणगौर नृत्य—गायन श्री संजय महाजन,बड़वाह के निर्देशन में 29 जनवरी को सायं 7 बजे प्रस्तुत किया जायेगा।

सूफी  गायन —
पीर पराई जाने रे.. सूफी  गायन श्री ध्रव सांगड़ी (दिल्ली) 30 जनवरी को सायं 7 बजे प्रस्तुत करेंगे।

उल्लास—
27 से 30 जनवरी तक प्रतिदिन उल्लास में बच्चों के गतिविधयों रूझान अनुसार विषय आधारित में महात्मा गांधी जी की दास्तान। कागज के खिलौने, कविता—कहानी सुनने—सुनाने, लिखने और चित्रों को बनाने की गतिविधयॉं प्रस्तुत होंगी।

देशान्तर—
27 से 29 जनवरी तक प्रतिदिन देशान्तर में विदेशी कलारूपों का प्रदर्शन होगा।

लोकराग-देशराग
"लोकराग" अंतर्गत 28 से 29 जनवरी प्रतिदिन सायं 7 बजे से प्रस्तुतियाँ होंगी और "देशराग" अंतर्गत 27 से 29 जनवरी प्रतिदिन सायं 7 बजे से प्रस्तुतियाँ होंगी 27 जनवरी को देशराग" में श्री बब्बन रवारी,गुजरात "रवारी गायन" प्रस्तुत करेंगे। 28 जनवरी को "लोकराग" अंतर्गत  सुश्री फूलवती, डिण्डौरी "बैगा जनजातीय गायन" की प्रस्तुति देंगी| इसके पश्चात "देशराग" अंतर्गत श्री शाहिद नियाजी नियाजी ब्रदर्स —रामपुर (उत्तरप्रदेश) "कव्वाली गायन" प्रस्तुत करेंगे। 29 जनवरी को "लोकराग" के अंतर्गत सुश्री रामरती अखण्डे, हरदा "कोरकू जनजातीय गायन" प्रस्तुत करेंगी| इसके पश्चात "देशराग" अंतर्गत श्री शाहिर अवधूत बापूराव विभूते,महाराष्ट्र  " पोवाड़ा गायन" प्रस्तुत करेंगे|

26 से 30 जनवरी प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से गोण्डों के कथा साक्ष्य के चित्र प्रदर्शनी गोण्डवानी,सौन्दर्य की नदी नर्मदा के जनजातीय कथा चित्रों की प्रदर्शनी शाश्वत,मिट्टी के खेल—खिलौनों एकाग्र प्रदर्शनी पिट्टू, गोण्ड जनजातीय चित्र शिविर एवं जनजातीय चित्र सृजन सह—विक्रय नाहाडोरा,विविध माध्यमों के शिल्प सृजन—सह विक्रय आकार,संस्कृति,कला ओर साहित्य आधारित पुस्तकें लोकवार्ता एवं अलग—अलग माध्यमों में शिल्प विक्रय की प्रदर्शनी रहेगी।

स्वाद
लोकरंग के विशाल परिसर में एक आकर्षण व्यंजन मेले का भी है। पाक कला में माहिर विभिन्न राज्यों जनजातीय देशज के व्यंजनकार अपने व्यंजनों से लुभायेंगे।