अतिथि विद्वानों को अपने मंत्री का इंतजार, अनशन पर बैठे हुए हैं प्रदर्शनकारी | MP NEWS

भोपाल। भोपाल स्थित शाहजहानी पार्क में चल रहे प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत अतिथिविद्वानों के धरना आंदोलन एवं भूख हड़ताल में कई जनप्रतिनिधि उनका हाल जानने पहुँचे किन्तु अतिथिविद्वानों को किसी का इन्तज़ार है तो वो हैं सूबे के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी और उनके आदेश का। उल्लेखनीय है कि अतिथि विद्वानों के चल रहे इस आंदोलन के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी अब तक उनका हाल जानने शाहजाहानी पार्क नही पहुँच सके है। 

अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजकद्वय डॉ देवराज सिंह एवं डॉ सुरजीत भदौरिया में अनुसार मंत्रीजी ने हमेशा ही किसी भी अतिथिविद्वान को सेवा से नही निकालने का केवल आश्वासन दिया है। जब भी उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई वे अपनी बात में अड़े रहे किन्तु आज दिनांक तक इस आशय का पत्र उच्च शिक्षा विभाग से जारी नही करवा सके है कि कोई भी अतिथि विद्वान, जिन्हें वे उच्च शिक्षा परिवार का सदस्य बताते है। सेवा से नही निकाला जाएगा और यही अतिथिविद्वानों की चिंता का सबसे बड़ा कारण भी है। जब मुख्यमंत्रीजी से लेकर उच्च शिक्षा मंत्रीजी ने अपनी बात में कहा है कि कोई बाहर नही होगा तो फिर एक विभागीय आदेश निकलवाने में क्या परेशानी है।

कई जनप्रतिनिधि शाहजहानी पार्क पहुँचे अतिथिविद्वानों का हाल जानने

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के डॉ जेपीएस चौहान के अनुसार शाहजहांनी पार्क भोपाल मे अतिथिविद्वान विगत 11 दिसंबर से आंदोलनरत हैं। इस दौरान पक्ष विपक्ष के कई जनप्रतिनिधि अनशनरत अतिथि विद्वानों का हाल जानने पहुँच चुके हैं। इसी कड़ी में आज कांग्रेस पार्टी के चित्रकूट विधायक नीलांशु चतुर्वेदी एवं ब्राह्मण महासभा के श्री चतुर्वेदी का आगमन हमारे पंडाल में हुआ। उन्होंने अतिथिविद्वानों की समस्याओं को सुना एवं उनकी बातें माननीय मुख्यमंत्री जी के समक्ष रखने का विश्वास दिलाया है। 

कड़ाके की ठंड भी कमज़ोर नही कर सकी अतिथिविद्वानों का हौसला

मोर्चा के डॉ आशीष पांडेय ने बताया है की पूरा प्रदेश इन दिनों  कड़ाके की ठंड के चपेट में हैं। राजधानी भोपाल में इस समय हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। लेकिन अतिथिविद्वानों का हौसला इतना मजबूत है कि वे 11 दिसंबर से मोर्चे पर डटे हुए हैं। यहां तक कि महिलाएं एवं बच्चे भी इस आंदोलन का हिस्सा है। भविष्य के प्रति उनकी चिंता इतनी बड़ी और विकट है कि अतिथिविद्वान इस कड़ाके की ठंड में अपनी जान हथेली पर रखकर सरकार से नियमितीकरण का वचन पूरा करवाने के लिए आंदोलन कर रहे है।