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7वां वेतनमान प्राप्त कर्मचारियों के प्रमोशन के नियम | EMPLOYEE NEWS

नई दिल्ली। 7वां वेतन आयोग (7th Pay Commission) के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले प्रमोशन की स्थिति केंद्र सरकार ने साफ की है। सरकार ने कहा है कि 2 जनवरी से 30 जून के बीच अगर किसी सरकारी कर्मचारी को प्रमोशन मिला है तो उसे पहला इंक्रीमेंट (Increment) 1 जनवरी से ही मिलेगा। मतलब कर्मचारी अगर 2 जनवरी से 30 जून के बीच प्रमोशन के बाद अगली इंक्रीमेंट की तारीख (Date of Next Increment, DNI) 1 जुलाई देगा तो उसे नहीं माना जाएगा। वित्‍त राज्‍य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने साफ किया ऐसी तारीखों में प्रमोशन पर अगला इंक्रीमेंट 1 जनवरी को ही मिलेगा।

ऑल इंडिया ऑडिट एंड अकाउंट्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी एचएस तिवारी ने बताया कि अफसरों को DoP (Date of Promotion) और DNI में कोई एक विकल्‍प चुनना होता है। यह रेगुलर प्रोसेस है लेकिन, जिन अफसरों को 2 जनवरी से 30 जून के बीच प्रमोशन मिला है, उन्‍हें छह माह की सर्विस पूरी करने के बाद ही पहला इंक्रीमेंट मिलेगा. लेकिन वह ड्यू डेट 1 जनवरी ही होगी।

क्‍या है आदेश में
सरकारी विभाग के एक्‍सपेंडिचर डिपार्टमेंट ने 28 नवंबर 2019 को इस संबंध में आदेश जारी किया था। इसके मुताबिक अगर कोई कर्मचारी प्रमोशन की तय तारीख से इतर प्रमोशन पाता है तो उसे इंक्रीमेंट छह महीने की सर्विस पूरी होने के बाद, 1 जनवरी या 1 जुलाई, जो तारीख पहले पड़ेगी उस पर ही पहला इंक्रीमेंट मिलेगा।

क्‍या है व्‍यवस्‍था
एचएस तिवारी ने बताया कि सरकार हर कर्मचारी को प्रमोशन की तारीख (Date of Promotion, DoP) या इंक्रीमेंट की अगली तारीख (Date of Next Increment, DNI) का विकल्‍प देती है। कर्मचारी जो विकल्‍प चुनता है उसे उस आधार पर फायदा होता है।

पहले की व्‍यवस्‍था
एचएस तिवारी के मुताबिक पहले 10, 20 और 30 साल पर कर्मचारियों को प्रमोशन मिलता था। उस समय एश्‍योर्ड कॅरियर प्रोग्रेशन (ACP) योजना थी। 7वें वेतन आयोग में इसे बदलकर मॉडीफाइड एर्श्‍योड कॅरियर प्रोग्रेशन स्‍कीम यानि MACPS कर दिया गया। 

क्‍या है MACPS
यह योजना 7वें वेतन आयोग के तहत लाई गई। इसके तहत ऐसे केंद्रीय कर्मचारियों का एनुअल अप्रेजल या इंक्रीमेंट नहीं होगा, जिनका प्रदर्शन अच्‍छा नहीं है। उन्‍हीं को प्रमोशन मिलेगा, जिनका प्रदर्शन अच्‍छा है।

क्‍या थी डिमांड
7वें वेतन आयोग के तहत MACPS के आने से क्‍लास थ्री और फोर्थ के कर्मचारियों को काफी नाराजगी थी क्‍योंकि यह प्रमोशन व्‍यवस्‍था लागू होने से उन कर्मचारियों का प्रमोशन रुक गया था, जो अप टू द मार्क नहीं थे।