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नगरीय निकाय चुनाव: राज्यपाल ने अध्यादेश रोका, कांग्रेस हमलावर हुई | MP NEWS

भोपाल। कमलनाथ सरकार नगरीय निकाय चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करना चाहती है। अध्यादेश पारित किया गया है कि नगरपालिका अध्यक्ष एवं महापौर आदि के चुनाव अब सीधे जनता द्वारा नहीं बल्कि 25 साल पहले की तरह पार्षदों के द्वारा किए जाएंगे। राज्यपाल ने इस अध्यादेश को रोक लिया है। इसी के बाद से कांग्रेस हमलावर हो गई है। 

राज्‍यपाल ने उठाया ये कदम

जानकारी के अनुसार निकाय चुनाव का कार्यकाल दिसंबर तक है। ऐसे में सरकार ने कैबिनेट से मंजूरी के बाद दो अध्यादेश राज्यपाल को अंतिम मंजूरी के लिए भेजे थे। इनमें से एक पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे और दूसरा मेयर यानी महापौर एवं नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव से जुड़ा था। राज्यपाल लालजी टंडन ने पार्षद प्रत्याशी के हलफनामे से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दी है, लेकिन मेयर के अप्रत्यक्ष चुनाव से जुड़े अध्यादेश को फिलहाल रोक दिया है। इस अध्यादेश को लेकर नगरीय विकास मंत्री जयवर्धन सिंह और प्रमुख सचिव संजय दुबे राज्यपाल से मुलाकात भी कर चुके हैं।

विवेक तन्खा ने मोर्चा संभाला

राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने राज्यपाल से राजधर्म का पालन करने की अपील की है। जबकि कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल का कहना है कि राज्यपाल को अध्यादेश को मंजूरी देनी चाहिए, लेकिन बीजेपी के दबाव में राज्यपाल काम कर रहे हैं। उन्हें दबाव में काम नहीं करना चाहिए। सरकार के जो भी फैसले हैं, उन्हें मान लेना चाहिए।

मैं कोई रबर स्टैंप नहीं है: राजयपाल

बता दें कि हाल ही में राज्यपाल लालजी टंडन ने सरकार को स्पष्ट संकेत दिया है। कुछ पत्रकारों को इंटरव्यू के लिए बुलाकर उन्होंने अपना मैसेज लाउट एंड क्लीयर कर दिया था। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं होगी। यहां कोई रबर स्टैंप नहीं है।" उन्होंने कहा कि रोजमर्रा के काम में मेरी कोई रुचि नहीं, लेकिन असाधारण स्थिति अथवा संविधान का उल्लंघन होने पर अंतिम अस्त्र और वीटो अधिकार मेरे पास है।

बीजेपी सड़क पर उतरकर विरोध करेगी

जिस अध्यादेश को राज्यपाल ने मंजूरी दी है। उसके अमल में आने के साथ ही यदि किसी भी प्रत्याशी ने हलफनामे में गलत जानकारी दी तो विधानसभा चुनाव की तरह उन्हें 6 माह की सजा और 25 हजार रुपए का जुर्माना होगा। कांग्रेस के अध्यादेश के विरोध में ऑल इंडिया मेयर्स काउंसिल के संगठन मंत्री एवं पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने राज्यपाल से मिलकर मेयर का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से नहीं, बल्कि सीधे जनता के चुनाव से किए जाने की मांग की है।