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मजदूर के बच्चों सीट पर करोड़पतियों ने कब्जा कर लिया: श्रमोदय आवासीय विद्यालय का मामला

इंदौर/ग्वालियर। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 में संभाग स्तर पर इंदौर, ग्वालियर, भोपाल और जबलपुर में श्रमोदय आवासीय विद्यालय खोले थे। इन विद्यालयों में निर्माण श्रमिक यानी ऐसे मजदूर जो साल में कम से कम घर से बाहर जाकर काम करते हैं के बच्चों को कक्षा छठी से लेकर 12वीं तक नि:शुल्क शिक्षा, यूनिफॉर्म, भोजन और हॉस्टल की सुविधा मुहैया कराई जा रही है। 

इस सरकारी योजनों के लाभ को देखते हुए इन संभागों में 500 से अधिक अभिभावकों ने साठगांठ कर निर्माण श्रमिक का पंजीयन करा लिया और अपने बच्चों के एडमिशन श्रमोदय विद्यालयों में करा दिए। इसके चलते जो अभिभावक वंचित हुए, उन्होंने मामले की शिकायतें करना शुरू कर दी। शिकायतों के आधार पर श्रम विभाग के अफसरों ने इन निर्माण श्रमिकों के फिजिकल वेरिफिकेशन के आदेश जारी किए हैं। फिजिकल वेरिफिकेशन के आधार पर अब इस मामले की जांच चल रही है। 

ग्वालियर में श्रम विभाग के अफसरों को संदेह है कि लगभग 40 प्रतिशत एडमिशन अपात्रों को दिए गए हैं। लगभग 800 स्टूडेंट्स श्रमोदय स्कूल में अध्ययनरत हैं, ऐसे में 40 प्रतिशत के हिसाब से 320 से अधिक अभिभावक यहां विभाग की जांच के दायरे में हैं। विभाग के अफसर एक माह के अंदर यह जांच पूरी कर रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपेंगे और वहां से इन अभिभावकों के खिलाफ रिकवरी सहित अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ऐसे हुआ खुलासा
हकीकत में जो निर्माण श्रमिक हैं, उनके पास दोपहिया वाहन भी नहीं होता है, लेकिन आवासीय स्कूलों में कई अभिभावक भारी सोने की चेन पहनकर एसयूवी से अपने बच्चों को छोड़ने के लिए पहुंचते थे। इसके अलावा ये बच्चे भी महंगे कपड़ों सहित अन्य सामग्री का उपयोग करते हैं।

प्रक्रिया चल रही है
श्रमोदय विद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों के अभिभावकों के निर्माण श्रमिक होने का हम वेरिफिकेशन करा रहे हैं। अपात्र मिलने पर हम रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजेंगे। वहां से दिशा-निर्देश मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। 
लक्ष्मीप्रसाद पाठक, सेक्रेटरी, मप्र भवन एवं संन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड