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होशंगाबाद कलेक्टर-SDM विवाद: प्रमुख सचिव ने जांच रिपोर्ट लौटाई

भोपाल। होशंगाबाद कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह एवं एसडीएम रवीर श्रीवास्तव के बीच हुए विवाद की जांच के लिए कमिश्नर रविन्द्र कुमार मिश्रा को नियुक्त किया गया था। उन्होंने 20 लोगों के बयान लेकर जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी परंतु प्रमुख सचिव ने यह रिपोर्ट वापस लौटा दी है क्योंकि इसमें उस रेत स्टाक और ईटीपी का तो जिक्र तक नहीं है जिसके कारण सारा फसाद हुआ। एसडीएम ने आरोप लगाया है कि अवैध रेत के खिलाफ कार्रवाई को रोकने के लिए कलेक्टर ने उन्हे अपने आवास पर रात 12:30 बजे से 3:30 बजे तक बंधक बनाकर रखा। 

प्रमुख सचिव ने रेत की रिपोर्ट मांगी

सूत्रों के मुताबिक कमिश्नर ने अपनी रिपाेर्ट रविवार रात ही कार्मिक विभाग की प्रमुख सचिव दीप्ती गाैड़ मुखर्जी काे भेज दी थी, लेकिन साेमवार काे मुखर्जी ने इस पर सवाल उठाते हुए कमिश्नर काे फटकार लगाई और रेत स्टाॅक व ईटीपी पाेर्टल काे लेकर विस्तृत जांच रिपाेर्ट मांगी है। एडीएम केडी त्रिपाठी और खनिज अधिकारी महेंद्र पटेल और एसडीएम की शिकायत में शामिल खनिज निरीक्षक अर्चना ताम्रकार देर रात तक नए सिरे से रिपाेर्ट बनाने में लगे रहे। रिपोर्ट में खनिज विभाग के पाेर्टल और ईटीपी के संचालन सहित रेत की मात्रा और स्टाॅक सत्यापन की जानकारी भी मांगी गई है। 

SDM कार्रवाई करने पहुंचे तो कलेक्टर ने तत्काल बुलवा लिया

12 सिंतबर काे जिला खनिज विभाग ने रेत स्टाॅकाें के पाेर्टल एक साथ बंद करने का काम किया पर एक स्टाॅक का पाेर्टल रात काे 7:30 बजे तक चलता रहा। दैनिक भास्कर में इसकी खबर प्रकाशित हुई थी। जांच करने एसडीएम पहुंचे थे। उन्हाेंने खनिज निरीक्षक और नायब तहसीलदार काे बुलाया था। अधिकारी डंपराें की जांच करने ताे नहीं पहुंचे लेकिन कलेक्टर निवास से एसडीएम काे हाजिर हाेने का काॅल आ गया। इसके बाद एसडीएम ने मामले में कलेक्टर के हस्तक्षेप पर सवाल उठाए। 

जानिए क्या हाेती ईटीपी और रेत स्टाॅक

बारिश के सीजन में 15 जून से 30 सितंबर तक नदियाें में रेत उत्खनन बंद रहता है। इस समय के लिए रेत खदान संचालक रेत काे खदान के आसपास में स्टाॅक कर लेते हैं। एनजीटी की राेक के दाैरान रेत काे बेचने के लिए ऑनलाइन परिवहन पास जिसे इलेक्ट्रिक ट्रांजिक पास (ईटीपी) कहते हैं, लेना हाेता है। यह पास जारी करने के लिए खनिज विभाग पाेर्टल पर रेत स्टाॅक की आईडी बनाकर पासवर्ड देता है। पाेर्टल काे बंद कराने ऑनलाइन खाेलने का अधिकार विभाग के पास हाेता है।