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मप्र महिला बाल विकास संविदा पर्यवेक्षकों की वेतनवृद्धि का आदेश | Order for increment of Contract Supervisors MPWCD

सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक सी-5-2/2018/1/3 दिनांक 05.06.2018 द्वारा राज्य शासन के विभिन्न विभागों में संविदा पर नियुक्त अधिकारी/कर्मचारियों को नियमित पदों पर नियुक्ति के अवसर प्रदान किए जाने हेतु निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें संविदा पर कार्यरत अधिकारी/कर्मचारियों को मासिक पारिश्रमिक समकक्ष नियमति पदों के वेतनमान के न्यूनतम वेतन का 90 प्रतिशत निर्धारित करने के निर्देश दिये है।

उल्लेखनीय है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत (अनुमोदित प्रशासकीय सेटअप में स्वीकृत) पर्यवेक्षक के 3409 नियमित पद स्वीकृत है। इन 3409 पदों में से वर्तमान में विभागांतर्गत संचालित एकीकृत बाल विकास परियोजनाओं में स्वीकृत नियमित पद के विरुद्ध वर्तमान में 480 संविदा पर्यवेक्षक कार्यरत हैं, जिन्हें नीति अनुसार लाभ दिया जाना है।

विभागीय भर्ती नियमानुसार संविदा पर्यवेक्षक का पद तृतीय श्रेणी अंतर्गत वर्गीकृत हैं तथा पर्यवेक्षक का वेतनमान सातवें वेतनमान में न्यूनतम वेतन रु. 25300/- है। बाल विकास परियोजनाओं में कार्यरत संविदा पर्यवेक्षक, लगातार संविदा पर्यवेक्षक के पद पर ही कार्यरत हैं। चूंकि विभाग द्वारा वर्ष 2012 के उपरांत संविदा पर्यवेक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है। अतः सभी कार्यरत पर्यवेक्षकों की सेवा अवधि 05 वर्ष या उससे अधिक की है वर्तमान में संविदा पर्यवेक्षकों को प्रतिमाह 13.948/- मानदेय दिया जा रहा है तथा प्रतिवर्ष उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि अनुसार मानदेय में वृद्धि का प्रावधान है।

राज्य शासन एतदद्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग में कार्यरत संविदा पर्यवेक्षक को सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश दिनांक 05.06.2019 की कंडिका 1.14.5 के संदर्भ में पर्यवेक्षक के नियमित पद के वेतनमान का न्यूनतम वेतन रु. 25300/-(सातवें वेतनमान) का 90 प्रतिशत अर्थात रुपये 22700/- प्रतिमाह (बाईस हजार सात सौ मात्र) किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

अतः उक्त स्वीकृति वित्त विभाग के पृष्ठांकन क्रमांक 1775/736/19 दिनांक 28/08/2019 पर आधारित है। संविदा पर्यवेक्षकों के लिए प्रस्तावित पुनरीक्षित मानदेय रुपये 22700/- (बाईस हजार सात सौ मात्र प्रतिमाह की पात्रता वर्तमान अनुबंध अवधि समाप्ति के उपरांत एवं अर्हता पूर्ण करने वाले पर्यवेक्षकों को ही होगी।
(पी.के. काकुर) उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, भोपाल, दिनांक/ 17 सितम्बर, 2019