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SAPAKS ने कहा: SC-ST कोटे में पहले ही ज्यादा प्रामोशन हो चुके हैं, अब नहीं होने देंगे

भोपाल। सामान्य, पिछड़ा व अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (सपाक्स) का प्रांतीय प्रतिनिधिमंडल मंत्री बृजेंद्र सिंह राठौर, वाणिज्य कर विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन से मिला और संस्था की मान्यता के संबंध बात की एवं इस बात पर विरोध जताया कि मान मुख्यमंत्री ने कल 40 से अधिक मान्यता/ गैर मान्यता प्राप्त संगठनों से चर्चा की लेकिन इस बैठक में सपाक्स को आमंत्रित नहीं किया गया।

मान मंत्री को अवगत कराया गया कि मान सर्वोच्च न्यायालय के "पदोन्नति में आरक्षण" प्रकरण में यथास्थिति के आदेश से सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग की पदोन्नतियों में कोई बाधा नहीं है, तत्संबंधी व्याख्या मान उच्च न्यायालय जबलपुर ने एक प्रकरण में स्पष्ट रूप से दे दी है साथ ही मंत्री जी को अवगत कराया गया कि अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग के अधिकारी कर्मचारी दो-दो तीन-तीन पदोन्नति प्राप्त कर चुके हैं चुके हैं एवं पदोन्नति के पदों में उनका प्रतिनिधित्व उनकी जनसंख्या के मान से कहीं बहुत ज्यादा है। 

सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के निर्णय अनुसार इनकी पदोन्नति करने का कोई विधि सम्मत या न्यायिक रास्ता नहीं बचा है एवं इससे अलग पदोन्नतियों की कोशिश यदि की जाती है तो सपाक्स पुन: सड़कों पर उतरकर विरोध करेगा तथा ऐसे किसी भी निर्णय को न्यायालय में चुनौती देगा।

पूर्व सरकार मान न्यायालय के आदेश की गलत व्याख्या कर अन्याय करती रही है एवं अपेक्षा है कि पूर्व सरकार की भांति वर्तमान सरकार सपाक्स वर्ग से अन्याय नहीं करेगा। सपाक्स व के प्रतिनिधियों द्वारा कहा गया कि वर्तमान में जो मूल वरिष्ठता है उसके आधार पर पदोन्नति की जा सकती हैं विभिन्न विभागों द्वारा जो वरिष्ठता सूची निकाली जा रही है वह सभी विधि सम्मत नहीं है अतः जारी की गई इन वरिष्ठा सूचियों के आधार पर पदोन्नति किया जाना भी विधि सम्मत नहीं होगा

मान मंत्री ने आश्वस्त किया कि किसी के भी साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। तथा माननीय मंत्री जी ने आश्वस्त किया कि वह संगठन की बात मानी मुख्यमंत्री जी तक पहुंचाएंगे। प्रतिनिधि मंडल में प्रांतीय पदाधिकारियों के अतिरिक्त सपाक्स की मंत्रालय ईकाई व भोपाल जिला ईकाई के पदाधिकारी तथा विभिन्न विभागों के कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।