MP PLANTATION SCAM: पढ़िए कहां कितना घोटाला हुआ

भोपाल। नर्मदा किनारे लगाए गए करोड़ों पौधे लापता हैं। वो केवल दस्तावेजों में ही नजर आ रहे हैं। जमीन पर उनके अवशेष भी नजर नहीं आ रहे हैं। यह खुलासा वन विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में हुआ है। यह मैदानी सर्वे वन मंत्री उमंग सिंघार के निर्देश पर हुआ था हालांकि वन विभाग भी मामले में लीपापोती की कोशिश कर रहा है और रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि 50 प्रतिशत पौधे मुरझा गए। 

बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस अभियान में वन विभाग के अलावा ग्रामीण विकास विभाग, कृषि, उद्यानिकी, वन विकास निगम और जन अभियान परिषद सहित सात अन्य विभागों ने पौधरोपण किया था। पौधरोपण के लिए बजट भी जारी हुआ था और कई बार यह सामने आया कि पौधे खरीदने में भी घोटाला हुआ है। 

बड़वानी में हुआ सबसे बड़ा घोटाला

गौरतलब है कि वन मंत्री द्वारा 19 फरवरी को विधानसभा में दिए गए निर्देश के बाद इन विभागों की जांच अब तक नहीं कराई गई है। विभागीय अफसर इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है लेकिन यह जरूर बताया है कि अन्य विभागों के निर्देश अब तक उन्हें नहीं मिले हैं। लेकिन वन विभाग द्वारा रौपे गए पौधों का सर्वे तो करवा लिया गया है। इसमें पता चला है कि एक दर्जन वन क्षेत्रों में से 80 फीसदी तक पौधे सूख गए हैं। बड़वानी में 32 से 50 फीसदी पौधे ही जीवित हैं यानी करीब 70 प्रतिशत पौधे लगाए ही नहीं गए थे। केवल गड्ढे खोदे गए थे। 

वनविभाग लीपापोती की कोशिश कर रहा है

इस मामले में वन विभाग के आला अधिकारी लीपापोती की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि घोटाले के केंद्र में वन विभाग के ही अधिकारी हैं। रिपोर्ट कुछ इस तरह से बनाई जा रही है कि 100 पौधे लगाए थे, 20 जीवित हैं। यानी 80 मुरझा गए हैं। जबकि घोटाला का मुद्दा ही यह है कि दस्तावेजों में 100 पौधे दर्ज किए, असल में 20 ही खरीदे, 80 पौधे अफसर खा गए। 

कहां कितना घोटाल

इंदौर में 45 से 50 फीसदी। इसी प्रकार सीहोर के एक परिक्षेत्र में 50 फीसदी, जबकि दूसरे परिक्षेत्र में 20 फीसदी। सिवनी, बालाघाट, अनूपपुर, मंडला, जबलपुर वन मंडल में 10 से 33 फ़ीसदी। भोपाल वन मंडल ने एक साल पहले एनजीटी को 80 फीसदी पौधे जीवित होना बताया था, लेकिन रिपोर्ट बदल गई है और नए सर्वे के हिसाब से 70 फीसदी पौधे ही शेष बचे हैं। यानी यहां 30 प्रतिशत का घोटाला जांच की जद में होना चाहिए। 

रिपोर्ट में उलझ गए मंत्रीजी

उमंग सिंघार, मंत्री, वन विभाग का कहना है कि नर्मदा किनारे पौधेराेपण में ढेरों गड़बड़ियां हुई हैं। पौधों का एक मैदानी सर्वे कराया है। इसकी जांच रिपोर्ट में देखा जा रहा है कि कहां क्या स्थिति है? जल्दी ही इस पर कार्रवाई करेंगे। 

का खुलासा करना है तो जांच पुलिस से कराएं

दरअसल, इस घोटाले की जांच एसआईटी के अलावा कोई नहीं कर सकता। कई विभागों के अफसर इसमें शामिल हैं। कुछ कलेक्टर भी हैं। वनविभाग के अधिकारियों को इसी तरह की आदत है। रिकॉर्ड उठाकर देख लीजिए, एक ही गड्ढे में दर्जन भर पौधारोपण हो जाते हैं। कुछ गड्ढे तो ऐसे हैं जहां पिछले 10 साल से लगातार पौधारोपण हो रहे हैं। अब केवल पुलिस विभाग ही है जो अपने तरीके से जांच कर सकता है और उसकी रिपोर्ट में 'जिंदा हैं', 'मुरझा गए' जैसे घोटाला को छुपाने वाले शब्द नहीं होंगे।