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FOOD SAFETY ACT: व्यापारियों ने बताया, आपत्तियां क्या हैं

ग्वालियर। क्या कहता है फूड सेफ्टी एक्ट? क्या रखनी हैं सावधानियां? क्या अधिकार हैं फूड सेफ्टी अधिकारी के? इन्हीं सब सवालों को लेकर फूड सेफ्टी एक्ट पर संवाद का आयोजन शनिवार को चेम्बर भवन में किया गया। आयोजित संवाद में एक्सपर्ट संजय बहिरानी-एडवोकेट, चेम्बर अध्यक्ष विजय गोयल, उपाध्यक्ष पारस जैन, मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी संयुक्त सचिव ब्रजेश गोयल एवं कोषाध्यक्ष वसंत अग्रवाल सहित काफी संख्या में व्यापारी एवं उद्योगपति उपस्थित थे। 

कार्यक्रम के प्रारंभ में चेम्बर अध्यक्ष विजय गोयल द्बारा पुष्प गुच्छ देकर फूड सेफ्टी एक्ट विशेषज्ञ संजय बहिरानी का स्वागत किया ग्या। स्वागत उदबोधन में विजय गोयल ने कहा कि कई बार अच्छे कार्य की चपेट में बुरे लोगों के साथ अच्छे लोग भी आ जाते हैं, इसलिए फूड सेफ्टी एक्ट के प्रावधानों को समझना बहुत जरूरी है। यह संवाद कार्यक्रम आज इसलिए ही आयोजित किया गया है। इस संवाद कार्यक्रम उपरांत निकलकर आने वाली फूड सेफ्टी एक्ट संबंधी खामियों को दूर करने हेतु शासन को लिखा जाएगा तथा व्यापारियों के स्तर पर जो कमियों होंगी उन्हें सुधारने का आग्रह चेम्बर द्बारा किया जाएगा। 

संजय बहिरानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि फूड सेफ्टी एक्ट का उद्देश्य यह है कि खाद्य वस्तुओं में मिलावट को रोका जाए और बगैर मिलावट अच्छा सामान देश के नागरिकों को उपलब्ध कराय जाए। आपने कहा कि किसी भी खाद्य वस्तु का विक्रय एवं उत्पादन के लिए रजिस्ट्रेशन/लायसेंस लेना आवश्यक है। 2.50 लाख से 25 लाख तक के टर्नओवर पर इस एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन तथा 25 लाख से ऊपर पर लायसेंस दिया जाता है। रजिस्ट्रेशन/लायसेंस न होना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसके साथ ही जो वस्तु बेची/उत्पादित की जा रही है, वह एक्ट के मानकों के अनुरूप होना चाहिए। फूड सेफ्टी एक्ट के तहत तहत तीन प्रकार के नमूने होते हैं, अमानक, अमानक-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक एवं असुरक्षित-मानव जीवन के लिए हानिकारक नहीं। इन नमूनों की जांच उपरांत ही विभाग द्बारा आप कार्यवाही तय की जाती है। 

सैम्पल अमानक सिद्घ होने पर जुर्माने की कार्यवाही की जाती है परंतु यदि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाया जाता है तो सजा का भी प्रावधान है। इसलिए व्यापारियों को इस एक्ट के संबंध में पूर्ण जानकारी होना चाहिए। एक्ट के प्रावधानों के अनुसार ही खाद्य वस्तुओं का विक्रय एवं उत्पादन करेंगे तो यह न केवल आपके व्यापार के लिए बेहतर होगा। एक सैम्पल फेल हो जाने पर ही विभाग द्बारा रासुका की कार्यवाही की जा रही है, जो कि अवैधानिक है और खाद्य सुरक्षा अधिकारी को रासुका लगाने का अधिकार नहीं है। चेम्बर को इस प्रकार की कार्यवाही को रोकने के प्रयास करना चाहिए। नमूना लेने पर विभाग द्बारा फार्म 5ए की प्रति व्यापारियों को दी जाना चाहिए जो कि सामान्यत: नहीं दी जाती है। 

संवाद कार्यक्रम में निकलकर आए निम्न बिन्दुओं पर चेम्बर द्बारा शासन को लिखा जाएगा
ब्राण्डेड सामग्री का विक्रय कर रहे हैं और सारे बिल पास हैं तब व्यापारी पर कार्यवाही क्यों?, व्यापारियों को सहयोग करने के लिए फूड सेफ्टी पर जागरूकता कार्यक्रम विभाग द्बारा किए जाने चाहिए। मानक का निर्धारण वर्तमान परिस्थिति अनुसार परिवर्तित होना चाहिए।, सीधे एफआईआर न की जाए। जिस अधिकारी ने कार्यवाही की है, उसकी सुनवाई उससे उच्च अधिकारी के द्बारा होना चाहिए। मध्यप्रदेश शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा कि खाद्य सुरक्षा संबंधी मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाए। फूड सेफ्टी टीम के साथ केवल कानून के प्रावधान में निर्धारित अधिकारी/कर्मचारी ही जांच की कार्यवाही के लिए जाएं। जब तक प्रत्यक्ष रूप से मिलावट स्पष्ट नहीं हो तब तक संस्थान को सीज न किया जाए एवं उस स्टॉक को किसी कमरे में माल की सीलिंग हो, व्यापारिक परिसर की सीलिंग न की जाए। 

कार्यक्रम के अंत में संजय बहिरानी को स्मृति चिन्ह मानसेवी संयुक्त सचिव ब्रजेश गोयल द्बारा प्रदान किया गया। संवाद कार्यक्रम का संचालन मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल द्बारा तथा आभार कोषाध्यक्ष वसंत अग्रवाल द्बारा व्यक्त किया गया।