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Zomato धर्म की राजनीति में कूदी, बात का बतंगढ़ बना दिया

भोपाल। मोबाइल एप के जरिए फूड के आर्डर लेकर ​डिलीवरी करने वाली कंपनी Zomato, अचानक धर्म और राजनीति में कूद पड़ी। कंपनी ने अपने एक ग्राहक का तमाशा बना दिया। उसे कट्टरवादी साबित किया गया। स्वभाविक है Zomato ने इसे मुद्दा बनाकर अपना प्रचार किया। 

मामला क्या है

जबलपुर के पंडित अमित शुक्ला ने Zomato को फूड डिलीवरी के लिए आउटसोर्स किया था। कंपनी ने जिस कर्मचारी को डिलीवरी के लिए नियुक्त किया, ग्राहक को वो पसंद नहीं आया और उसने कंपनी से डिलीवरी बॉय बदलने का अनुरोध किया। पंडित अमित शुक्ला ने पूरी ईमानदारी से बताया कि वो एक ब्राह्मण है, श्रावण का पवित्र महीना चल रहा है और डिलीवरी बॉय स्वभाविक मांसाहारी है, अत: कृपया डिलीवरी बॉय बदलें। Zomato ने ना तो डिलीवरी बॉय बदला और ना ही ग्राहक द्वारा आदेश निरस्त करने पर उसके पैसे वापस किए। 

बात का बतंगढ़ बना दिया


पंडित अमित शुक्ला ने इसके लिए कंपनी के कर्मचारियों को दोषी माना ओर प्रबंधन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए एक ट्वीट किया। Zomato ने इस ट्वीट पर रिप्लाई किया 'Food doesn’t have a religion. It is a religion.' यानी 'भोजन सामग्री का कोई धर्म नहीं होता बल्कि भोजन खुद एक धर्म होता है।' Zomato के प्रति मित्रता रखने वाले मीडिया घरानों ने ग्राहक को कट्टरवादी और कंपनी को लोकतंत्र के नायक के तौर पर पेश किया। 

Zomato ने क्या गलत किया

Zomato भूल गई कि वो सिर्फ फूड के आर्डर लेकर ​डिलीवरी करने वाली कंपनी है। ग्राहक Zomato को अनुबंधित करता है कि वो ग्राहक के पसंदीदा रेस्त्रां से ग्राहक की पसंद की भोजन सामग्री लाकर डिलिवर करे। यानी कंपनी केवल एक कोरियर है, पार्सल पहुंचाने वाला डाकिया। यहां ग्राहक को हक है कि वो यदि उसे डिलीवरी बॉय पसंद नहीं है तो वो बदलने के लिए आदेशित करे और व्यापारिक धर्म यह कहता है कि कंपनी को विम्रतापूर्वक ग्राहक के आदेश का पालन करना चाहिए या फिर उतनी ही विनम्रता से इंकार कर देना चाहिए। इस प्रकरण में कंपनी ने ऐसा नहीं किया। 

कल को Zomato किसी भी ढाबे का खाना ले आएगी

जिस ​तरह से Zomato ने ग्राहक का तमाशा बनाया है, निश्चित रूप से उसने एक ग्राहक वर्ग को उससे दूर जाने के लिए बाध्य कर दिया है। ग्राहक को अधिकार है कि वो अपनी पसंद का रेस्त्रां और खाद्य पदार्थ का चुनाव करे। कल को Zomato किसी भी ढाबे से कुछ भी लाकर दे देगी और इसी तरह का कोई कुतर्क करने लगेगी। 

धर्म की राजनीति में अपने धर्म से भटकी Zomato

धर्म की राजनीति में Zomato कंपनी अपने धर्म से भटक गई। उसका सिर्फ एक धर्म है, ग्राहक की सेवा करना। यदि ग्राहक गलत आदेश दे तो विनम्रतापूर्वक इंकार कर देता। यदि ग्राहक उद्दंडता करे तो चतुराई के साथ संबंध तोड़ लेना। ग्राहक का तमाशा बना देना किसी व्यापार का धर्म नहीं होता। Zomato अपने धर्म से भटक गई।