Loading...    
   


12वीं पास डॉक्टर 5 साल से प्रैक्टिस कर रहा था, 90 हजार मरीजों का इलाज किया | NATIONAL NEWS

नई दिल्ली। राजस्थान से एक चौंकाने वाली खबर आ रही है। सीकर शहर में एक प्राइवेट अस्पताल में फर्जी डॉक्टर पकड़ा गया है। मान सिंह बघेल (44) नाम का यह व्यक्ति कृष्ण कन्हैया केयर अस्पताल (KANHAIYA CARE HOSPITAL, SIKAR) में नौकरी कर रहा था। अस्पताल से उसे 1 लाख रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता था। वो हर रोज 25 मरीजों का इलाज करता था। 5 साल में उसने 90 हजार मरीजों का इलाज किया। सवाल यह है कि क्या इस तरह के और भी डॉक्टर देश में प्रैक्टिस कर रहे हैं। सवाल यह भी है कि प्राइवेट अस्पताल डॉक्टर को नियुक्त करने से पहले क्या किसी तरह की जांच करते हैं या फर्जी डिग्री के आधार पर कोई डॉक्टर बन सकता है। 

डॉक्टर की डिग्री ट्रेन में पड़ी मिली थी

महज 12वीं पास मानसिंह पांच महीने से सीकर में तैनात था। इससे पहले उसने 9 साल तक आगरा में क्लीनिक चलाया। दोनों जगहों पर उसने करीब 90 हजार मरीजाें काे जांचा। उसका दावा है कि पांच साल पहले मथुरा जाते समय उसे ट्रेन में डाॅक्टर मनाेज कुमार की डिग्री पड़ी मिली थी। उसी के अनुसार अपने बाकी फर्जी पहचान पत्र भी तैयार कर लिए थे। सीकर के अस्पताल में वह मरीजों को एक जैसी दवा ही देता था।

गंभीर मरीजों को रेफर कर देता था

इलाज के लिए घरेलू नुस्खे ज्यादा आजमाने की बात करता था। जून के दूसरे हफ्ते में एक महिला दिल की बीमारी का इलाज कराने पहुंची। इस फर्जी डॉक्टर ने महिला को ड्रिप चढ़ा दिया। हालत बिगड़ने पर उसे दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ा। अस्पताल प्रशासन ने जब उसके वोटिंग कार्ड की जांच की, ताे उसमें दूसरी पहचान मिली। मानसिंह मूल आगरा का रहने वाला है। वह सभी मरीजों को पैरासीटामोल जैसी सामान्य दवाएं लिखता था। गंभीर मरीजों को अन्य अस्पताल रेफर कर देता था।

जिसकी डिग्री पर नौकरी कर रहा था उस डॉक्टर का अपना अस्पताल है

असली डाॅक्टर मनाेज कुमार का हरियाणा के पलवल जिले में सहारा अस्पताल है। उनकी पत्नी प्रियंका भी डाॅक्टर हैं। उनकी डिग्री के नाम पर फर्जी तरीके से नाैकरी करने की जानकारी मिलने पर वह सीकर आए। उन्हाेंने बताया कि उनका बैग 2005 में बस से चाेरी हाे गया था। उन्हाेंने बैग चाेरी हाेने की रिपाेर्ट भी दर्ज करवाई थी। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि अगर मनोज का बैग 2005 में चोरी हुआ था, तो मानसिंह को डिग्री पांच साल पहले ट्रेन में कैसे मिली?


भोपाल समाचार: टेलीग्राम पर सब्सक्राइब करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें Click Here
भोपाल समाचार: मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कृपया यहां क्लिक करें Click Here