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अब प्रभारी मंत्री ही होगा जिले का मुख्यमंत्री: दिग्विजय सिंह का फार्मूला फिर एक्टिवेट | MP NEWS

भोपाल। दिग्विजय सिंह ने अपने कार्यकाल में यही किया था। कमलनाथ सरकार उसी फार्मूले को फिर से एक्टिवेट करने जा रही है। इसके तहत प्रभारी मंत्री को जिले में सबसे ज्यादा पॉवर दे दी जाएगी। एक तरह से प्रभारी मंत्री जिले का मुख्यमंत्री हो जाएगा। जिला सरकार को लेकर राज्य सरकार ने एक ड्राफ्ट बनाने का निर्णय लिया है। इसकी जवाबदेही योजना एवं सांख्यिकी विभाग को दी है। उम्मीद जताई जा रही है जून में इस पर बहुत कुछ काम हो जाएगा और जुलाई से जिला सरकार की अवधारणा धरातल पर दिखने लगेगी। 

इस कॉन्सेप्ट में जो कमियां थीं उन्हे दूर किया जा रहा है: मंत्री हर्ष यादव
हर्ष यादव, कुटीर, लघु उद्योग एवं नवकरणीय ऊर्जा एवं प्रभारी मंत्री विदिशा, मप्र का कहना है कि पूर्व में कांग्रेस की सरकार इस कॉन्सेप्ट पर काम कर चुकी है। प्रभारी मंत्रियों को नीतिगत निर्णय, ट्रांसफर, विकास की प्राथमिकताएं तय करने का अधिकार मिलेगा। इससे संबंधित जिले का विकास कहीं अधिक गति से होगा। लोगों को छाेटे-बड़े काम के लिए राजधानी तक नहीं जाना पड़ेगा। प्रशासनिक कसावट लाने में यह व्यवस्था बहुत कारगर होगी। पिछली कांग्रेसी सरकार में इस कॉन्सेप्ट में कुछ कमियां देखी गईं थी, जिन्हें दूर किया जा रहा है। बजट भी बढ़ाया जा रहा है। 

15 साल पहले जिला सरकार के कारण ही उनकी सरकार गई थी
गोपाल भार्गव, नेता प्रतिपक्ष, मप्र विधानसभा, भोपाल मप्र का कहना है कि जिला सरकार के कारण कांग्रेस 2003 में सत्ता से बाहर हुई थी। उस समय भी इस कॉन्सेप्ट के जरिए तत्कालीन मंत्रियों ने भ्रष्टाचार किया था। अब भी यही होगा। कर्मचारी-अधिकारियाें से वसूली की प्रवृत्ति बढ़ेगी। मनमाने ढंग से ट्रांसफर का अधिकार मिलने से कर्मचारी-अधिकारी वर्ग दहशत में रहेंगे, इससे प्रशासनिक अराजकता के हालात बनेंगे। दरअसल इस पूरे हथकंडे के पीछे मुख्यमंत्री कमलनाथ का अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटना मुख्य वजह है। पहले भी जिला सरकार कांग्रेस के जाने की वजह बना था, अब भी यही कारण बनेगी।