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बंगाल की लड़ाई अदालत में | EDITORIAL by Rakesh Dubey

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की चुनावी लड़ाई अब कानून के मैदान में जा पहुंची है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के भतीजे अभिषेक ने नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को क़ानूनी नोटिस (Legal notice) भेजा है। यह सब तो अपेक्षित था क्योंकि ममता बनर्जी ने इस बार आम चुनावों के आखिरी चरण को “युद्ध” में बदल दिया।फलस्वरूप भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) भी मुकाबले के लिए सडक पर उतर गई। यह सब प्रजातंत्र के लिए ठीक नहीं था। इस सबका भविष्य ठीक नहीं है। पहले कांग्रेस और वामदल भी ममता की राजनीति का शिकार हो चुके हैं। ममता जमीनी संघर्ष की तरह चुनाव लडती हैं।

ममता की झल्लाहट से तो मंत्रिमंडल की उनके साथी भी चिढ़ने लगे हैं। उनके एक मंत्री ने मंत्रीमंडल की बैठक में यह तक कह डाला कि 'अगर कोई यह सोचता है कि ममता रवींद्रनाथ ठाकुर से बेहतर कवि हैं, बीथोवन से बेहतर संगीतकार हैं और लियोनार्दो दा विंची से बेहतर चित्रकार यह अहसास बराबर दिलाते रहना ही समस्या है। 'तमाम राजनीतिक तबका ममता ऐसे बिगड़ैल बच्चे की तरह देखता है। जिसे बड़े लोगों के बीच अकेले जाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।

अभाव ही ममता का स्वभाव बन गया है। ममता का पालन-पोषण मुश्किल हालात में हुआ था। जब वह एक छोटी बच्ची थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। अब उनके लिए ये अवाम ही उनका परिवार है। वह इस बात को इतनी शिद्दत से मानती हैं कि अपने परिवार के किसी भी समारोह में शामिल नहीं होती हैं। ममता के उत्तराधिकारी माने जा रहे उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की कुछ साल पहले दिल्ली में सगाई हुई थी। करीब तीन दिनों तक कार्यक्रम चलते रहे लेकिन ममता ने कोई खास व्यस्तता न होते हुए भी उन कार्यक्रमों से खुद को अलग ही रखा था। अब वो ही अभिषेक ममता की ओर से कानूनी लड़ाई का झंडाबरदार है ममता तुनकमिजाज हैं, पसंद-नापसंद को लेकर सख्त राय रखती हैं और बहुत ही कम लोगों पर उनको भरोसा है।

सवाल यह है ममता ने बंगाल में भाजपा को अपना आधार मजबूत करने का मौका कैसे दे दिया? तृणमूल के समर्थक कहते हैं कि इसके लिए ममता केवल खुद को ही दोष दे सकती हैं। पूरे बंगाल में सरकारी जमीन पर नई मस्जिदें बन गई हैं। बाहरी पर्यटकों को उनके शुभचिंतक यह सलाह देते हैं कि कभी भी सड़क पर किसी मुस्लिम के साथ बहस न करें। अगर ऐसा किया तो पुलिस पहले आपको गिरफ्तार करेगी और फिर पूछताछ करेगी। ममता ने बेतुकेपन की हद तक सकारात्मक कार्यवाही का नियम लागू किया हुआ है। स्वाभाविक तौर पर लोगों के बीच इसका प्रतिवाद हुआ है और जिन हिंदुओं ने कभी खुद को हिंदू मतावलंबी के तौर पर नहीं देखा था, अब वे भी भाजपा के पीछे लामबंद हो रहे हैं।

नरेंद्र मोदी कह चुके है कि तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। अगर लोकसभा चुनाव में तृणमूल का प्रदर्शन खराब रहता है तो उसके विधायकों के भाजपा के पाले में जाने की संभावना बनेगी। दो साल बाद बंगाल में विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं। जाहिर है कि बंगाल अब भाजपा का नया मोर्चा बन चुका है। 
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श्री राकेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।
संपर्क  9425022703        
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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