BHOPAL NEWS: टमाटर 60 रुपए किलो, 3 दिन पहले 20 रुपए था

भोपाल। राजधानी में टमाटर की आवक कम रहने से दाम तीन गुना महंगे हो गए हैं। मंगलवार को शहर के बाजारों में टमाटर 60 रुपए प्रति किलो बिका। दो-तीन दिन पहले तक इसके दाम 20 रुपए प्रति किलो थे। दाम बढ़ने की वजह इसकी आवक घटकर आधी होना बताई जा रही है। शहर में रोजाना 1.35 लाख किलो टमाटर की आवक हो रही थी। अब यह घटकर आधी रह गई है। 

बकतरा और बाड़ी-बरेली से आता था टमाटर

किसान संगठनों की हाड़ताल भी शुरू हो गई है। इस दौरान किसानों मे मंडी में सप्लाई नहीं करने का ऐलान किया है। अगर ऐसा होता है और हड़ताल लंबी खिचती है तो टमाटर सहित अन्य सब्जियों के दामों में काफी इजाफा हो सकता है। व्यापारियों का कहना है कि शहर में टमाटर की सबसे ज्यादा आवक बुदनी के पास स्थित बकतरा और रायसेन के बाड़ी-बरेली गांवों से हो रही थी। इन क्षेत्रों से आवक घटकर आधी रह गई है। अब बेंगलुरू से टमाटर की आवक हो रही है। 

बेंगलुरू से बुलवाना पड़ रहे हैं

बिट्टन मार्केट सब्जी व्यापारी संघ के अध्यक्ष एवं थोक व्यापारी हरिओम खटीक ने बताया कि इन क्षेत्रों के अलावा भोपाल के पास स्थित इस्लाम नगर से भी टमाटर शहर में पहुंच रहे थे। यह लोकल टमाटर बाजार में बहुत कम आ रहे हैं। बेंगलुरू से बुलाकर डिमांड पूरी की जा रही है। इसलिए भाड़ा भी ज्यादा लग रहा है। इसी वजह से टमाटर के थोक दाम ही 40-50 रुपए प्रति किलो हो गए हैं। आवक कम होने से फुटकर व्यापारी अब्दुल वाहिद ने बताया कि मंगलवार काे टमाटर 60 रुपए प्रति किलाे के दाम पर बेचना पड़ा। 

ऐसे समझें 1.35 लाख किलो का गणित

छaटी-बड़ी सभी गाड़ियों में रोजाना 5 हजार कैरेट टमाटर भोपाल की करोंद, भदभदा, हबीबगंज समेत अन्य मंडियों में पहुंच रहे थे। एक कैरेट में करीब 27 किलो टमाटर की क्षमता होती है। इस हिसाब से 5 हजार कैरेट में 1.35 लाख किलो टमाटर बनते हैं। 

तापमान अत्यधिक बढ़ा है और लगातार दो साल से कम हुई बारिश के कारण भू जल स्तर तेजी से गिरा है। जनवरी से लगातार यह कम हो रहा है। खुले में जो फसल होती थी, पानी की कमी के कारण उसका रकबा 50 फीसदी से भी कम हो गया। प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन यानी पॉली हाउस, ग्रीन हाउस व नेट हाउस के भीतर होने वाली खेती से ही उत्पादन हो रहा है। पानी कम होने से इस पर भी 25 फीसदी असर पड़ा है। पानी की कमी होगी तो टमाटर की वेजीटेटिव ग्रोथ कम होगी तो फूल और फ्रूट सेट होने की प्रक्रिया थम जाएगी।
डॉ. एमएस परिहार, चीफ साइंटिस्ट, फल अनुसंधान केंद्र ईटखेड़ी