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भोपाल में कर्मचारियों का ढाई लाख वोट कहां जाएगा, पंडित भी परेशान | EMPLOYEE NEWS

भोपाल। चुनावी राजनीति (Electoral politics) में वोटों की भविष्यवाणी करने वाले राजनीति के पंडित जो खुद को विशेषज्ञ भी बताते हैं, अब तक तय नहीं कर पा रहे हैं कि भोपाल लोकसभा सीट में उपस्थित कर्मचारी एवं उनके परिवारों के ढाई लाख वोट (Two and a half million votes) कहां जाएंगे। दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) तो माफी तक मांग चुके हैं जबकि भाजपा ने अपने कर्मचारी नेता सक्रिय कर दिए हैं। वो लोगों को दिग्विजय के 10 साल याद दिला रहे हैं। 

बता दें कि भोपाल लोकसभा सीट पर 19 लाख 36 हजार वोट में लगभग ढाई लाख वोट कर्मचारी (Karmachari) वर्ग से जुड़े हैं। इसलिए जीत के गणित में शासकीय कर्मचारी (Government employee) एवं उनसे जुड़े मतदाताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। भाजपा और कांग्रेस ने कर्मचारी वोटरों को लुभाने के लिए रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। भले ही भाजपा का प्रत्याशी अभी तय नहीं हुआ है, लेकिन वह प्रदेश में दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) शासनकाल के दौरान कर्मचारी वर्ग में उपजी नाराजगी को भुनाने की रणनीति तैयार कर रही है। वहीं दिग्विजय सिंह कर्मचारी संगठनों से माफी मांगने के बाद लगातार उनके संपर्क में भी हैं। कांग्रेस ने कर्मचारी वोटरों को मनाने की जिम्मेदारी मंत्री पीसी शर्मा (Minister PC Sharma) को सौंपी है। दोनों ही दल विधानसभा वार कर्मचारियों का पूरा डाटा जुटा रहे हैं। भोपाल सीट की आठ विधानसभाओं में सर्वाधिक मतदाता भी दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में है। यहां बूथ स्तर पर प्रबंधन के साथ घर-घर संपर्क का अभियान चलाने की तैयारी दोनों ही दलों ने की है।

कर्मचारी दिग्विजय सिंह से क्यों नाराज हैं / Why are the employees angry with Digvijay Singh

जब दिग्विजय सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब उनकी नीति-निर्णयों का भारी विरोध कर्मचारी-अधिकारियों ने किया था। एक दशक तक दिग्विजय सिंह शासनकाल के बाद प्रदेश में वर्ष 2003 में हुई सत्ता परिवर्तन का यह बड़ा कारण माना जाता है। इसके बाद भाजपा की सरकार बनी। इनमें 20 हजार से ज्यादा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को सेवा समाप्त करना, रिटायरमेंट पॉलिसी, (Termination of service to the employees of daily wages, retirement policy) निगम मंडलों को बंद करने के निर्णय नारागजी की प्रमुख वजह रही।

तो क्या कर्मचारी भाजपा से संतुष्ट हैं / So are the employees satisfied with the BJP

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) के तीसरे शासनकाल (2013 से 2018) में कर्मचारी संगठन ने सर्वाधिक आंदोलन किए। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी बताते हैं कि वर्ष 2015 से लगातार राज्य स्तरीय आंदोलन के जरिए भाजपा सरकार का विरोध करना शुरू कर दिया था। मंचों से सावर्जनिक तौर पर भाजपा को वोट न देने की अपील भी की गई थी। इनमें वेतन विसंगति, संविदा कर्मियों के नियमितिकरण, ग्रेड-पे में विसंगति, लिपिक वर्ग कर्मचारियों की मांग, दैवेभो के स्थाई कर्मी के बाद भी सुविधाए नहीं मिलना, केंद्र की तरह सातवें वेतनमान की मांग जैसे कई मुद्दे पर कर्मचारियों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी। विधानसभा चुनाव में दक्षिण-पश्चिम सीट पर भाजपा उम्मीदवार उमाशंकर गुप्ता को कर्मचारियों की नाराजगी का खामियाजा उठाना पड़ा था।