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एक उम्मीद नरेन्द्र मोदी से थी कि वह अपराधी तत्वों को... | POLITICAL REVIEW

डाॅ.शशि तिवारी। जिस उद्देश्य को ले भारत के संविधान (Constitution of India) में जनप्रतिनिधि की कल्पना की गई थी वह अब कहीं न कहीं धूल धूषित हो रही है। लोगों द्वारा लोगों के लिए जनता द्वारा सरकार का चुनाव (Election) ही वास्तविक लोकतंत्र (Democracy) है। जनता का प्रतिनिधि एवं सेवक आज के दौर में केवल मालिक बन गया है बल्कि वह तानाशाह भी हो गया है। स्वच्छ छवि के लोग आज की राजनीति में अति नगण्य हैं आज राजनीति की गंगा स्याह काली हो गई है, जिसमें अपराधी तत्वों की भरमार है। आज कोई भी पार्टी इससे अछूती नहीं है बल्कि एक से बढ़कर एक अपराधियों को खड़ा करना ही राजनीतिक पार्टी (POLITICAL PARTY) में एक प्रतिस्पर्धा को विषय बनी हुई है। 

एक उम्मीद (HOPE) नरेन्द्र मोदी (Narendra Modi) से थी कि वह अपराधी तत्वों को पार्टी से दूर रखेंगे क्योंकि उन्होंने पहली बार जब संसद में माथा टेक कर प्रवेश किया था तब यह प्रण भी लिया था कि अपराधियों की जगह संसद में नहीं जेल में है। लेकिन विगत् पांच वर्षों में कुछ भी नहीं हुआ, कुछ तो इसे भी जुमला मान बैठे है। रातों-रात अमीर बनते सांसदों (MPs) का भी लेखा-जोखा सामने आने पर भी मूक दर्शक की भांति देखना किसी अपराध से कम नहीं। आज संसद में 70. प्रतिशत करोड़पति सांसद है फिर जनता के पैसों पर ऐश करते इन्हें कोई झिझक नहीं होती है और पेंशन लेने में भी कोई गुरेज नहीं। आज राजनीति केवल धंधा है अपने धन्धे को चमकाने का माध्यम मात्र है। अब जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है नेताओं के जहर बुझे भाषण भी शुरू हो गए है। अब चुनाव भी कोई 10-15 दिन का ही होता है। 

प्रारंभ में सभी विकास की बात करते है लेकिन जैसे-जैसे चुनाव का समय आता है तब विकास की बात छोड़ जाति, धर्म, समाज, स्थानीय बनाम बाहरी मुद्दों पर उतर आते है। आज के चुनाव नेताओं के लिए केवल तू-तू मैं-मैं ही है। अब चुनाव अप्रैल-मई में होना है इस वक्त न केवल प्रकृति का ताप बढ़ा होगा बल्कि राजनीति का ताप भी चरम पर होगा जिसमें नेता एक दूसरे न केवल कीचड उछालेंगे बल्कि उनके चरित्र का हनन करने में भी कोई कोर कसर नहीं छोडेंगे। चूंकि गर्मी का वक्त होगा और गर्मी में धूल भरी आंधियां भी चलती है लेकिन राजनीति के धूल की आंधी से नेतागण जनता की आंखों में मंदिर मस्जिद, जाति, धर्म की धूल ही झोकेंगी। 

निःसंदेह आज राजनीति में हम इतने खुदगर्ज हो गए है कि अपने फायदे के लिए देश के वीर जवानों पर भी राजनीति करने एवं उसका राजनीतिक लाभ लेने से भी नहीं चूंकते। देश भक्ति की बात करने वाले नेताओं में से कितनों के बच्चे सेवा में है? ये किस मुंह से देशभक्ति जनता को सिखायेंगे? ये तो भारत की जनता ही है जो भारत पर आने वाली किसी भी विपत्ति एवं मानव निर्मित में न केवल एकजुट रहती हैं बल्कि आगे बढ़ बिना किसी भेदभाव, स्वार्थ के तन, मन, धन से आगे रहती हैं। 

हाल ही में हमारी सेनाओं को लेकर जो छीछालेदर राजनीतिक दल कर रहे हैं। जो राजनीतिक लाभ लेने की जुगत में है दोनों ही एक तरफ के दो पड़ले हैं। इस कृत्य को किसी भी सूरत में सराहा नहीं जा सकता आखिर कब राजनीति में शुचिता आयेगी, कब हम जाति धर्म से ऊपर उठेंगे? कब हम तुष्टीकरण को छोडेंगे? आखिर कब तक जनता की भावनाओं से खेलेंगे। 
डाॅ.शशि तिवारी का संपर्क 9425677352