मंत्री जीतू पटवारी के उच्च शिक्षा विभाग में प्रमोशन घोटाला ? | MP NEWS

Bhopal Samachar
भोपाल। मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री जीतू पटवारी के उच्च शिक्षा विभाग में प्रमोशन घोटाला का प्लॉट तैयार हो गया है। इस बार 400 कर्मचारियों को कानून की आंख में धूल झोंककर प्रमोशन दिया जा रहा है। भाजपा शासन काल में 1600 कर्मचारियों को भी इसी तरह प्रमोशन दिया गया था। यानी सरकार बदल गई लेकिन हालात यथावत हैं। बता दें कि शिवराज सिंह सरकार के समय जीतू पटवारी अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी प्रदर्शन किया करते थे। 

शिवराज सिंह सरकार में छल किया गया था

बता दें कि उच्च शिक्षा विभाग के कॉलेजों के टीचिंग पोस्ट पर होने वाले प्रमोशन के मामले में ग्वालियर खंड पीठ ने यूजीसी रेगुलेशन 2010 के अनुसार कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए हैं। विभागीय अफसरों ने इसका तोड़ निकाला और प्रमोशन को 'पदनाम परिवर्तन' दर्ज करके 1600 से अधिक कर्मचारियों को असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर बना दिया इसी तरह एसोसिएट से प्रोफेसर बना दिया। यह स्पष्ट रूप से एक प्रमोशन ही है जो हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन भी है परंतु कलम की का​रीगरी से इसे आसानी से अंजाम दिया गया। कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बाद भी विभाग ने नए नियमों को नहीं मानकर भर्ती नियम 1990 के अनुसार बैकडेट से फैकल्टी को लाभ दे दिया है।

कमलनाथ सरकार भी वैसा ही कर रही है 

सूत्रों के अनुसार अब एक बार फिर ऐसा करने की तैयारी है। इस बार 400 से लोगों को इसका लाभ देने की तैयारी हो चुकी है। यह 2010 से 2015 के बीच के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इस बार भी विभाग पुराने नियमों से कार्रवाई कर रहा है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा भर्ती नियमों में समय-समय पर परिवर्तन करता रहता है। वहीं, मप्र शासन ने भी इन्हें लागू कर लिया है। इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर चुका है। यूजीसी के नियमों को लेकर ही ग्वालियर खंड पीठ में मध्यप्रदेश शासकीय महाविद्यालयीन शिक्षक संघ की ओर से याचिका दायर की गई थी। इसमें वर्ष की गई थी कि उच्च शिक्षा विभाग यूजीसी के नए नियमों के अनुसार प्रमोशन देने की कार्रवाई करे। इसके चलते कोर्ट ने जुलाई 2011 में ने मप्र सरकार को निर्देश दिए थे कि यूजीसी रेगुलेशन 2010 के अनुसार कार्रवाई की जाए। इस आदेश के बाद विभाग ने अगले तीन साल तक प्रमोशन और ग्रेड में बढ़ाने की कार्रवाई नहीं की गई। धीरे-धीरे ग्रेड के लाभ देना शुरू कर दिया। लेकिन, आरक्षण का विवाद सुप्रीम कोर्ट होने के बाद विभाग ने पदनाम परिवर्तन का रास्ता खोज पुराने भर्ती नियम से लाभ देना शुरू कर दिया। 
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