PAKISTAN की औकात नहीं कि वो INDIA में एक फुलझड़ी भी जला सके | Arvind Rawal @ My Opinion

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PAKISTAN की औकात नहीं कि वो INDIA में एक फुलझड़ी भी जला सके | Arvind Rawal @ My Opinion


श्रीनगर के पुलवामा में हुए सैनिक हमले से पूरा हिंदुस्तान सदमे में है। इस हमले में हमारे 46 बहादुर जवान शहीद हुए है और कई जवान आज भी हॉस्पिटल में मौत से संघर्ष कर रहे है। देश से प्यार करने वाला हर शख्स यही चाहता है कि अब पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से बदला ले लिया जाय। बेशक भारत सरकार का हुक्म हो तो एक घण्टे से कम समय मे भारतीय सेना पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से गायब कर देगी। भारतीय सेना में वह दम भी है कि पाकिस्तान में लाशों को दफनाने के लिए हाथ तक नसीब नही होंगे लेकिन प्रश्न यह है कि हम उनका क्या करे जो हमारे देश के अंदर पाकिस्तानी प्रेमी ओर उनके आतंक के पनाहगार जो मौजूद है ?

सीमा पर सेना की इतनी चौकसी है कि न पाकिस्तान फ़ौज ओर न कोई आतंकी संगठन की इतनी औकाद है कि वह किसी आतंकी को या कोई विस्फोटक सामग्री को सीमा पार से हमारे देश मे भेज सके। यह जानकर बड़ा दुख होगा कि पाकिस्तान के प्रति हमदर्दी रखने वाले कई राजनीतिक दलों के राजनेता, सामाजिक संगठन, छात्र यूनियन ओर जम्मू कश्मीर सरकार के कई विभागों के अधिकारी कर्मचारी ओर कई लोग है जो हमारे देश के ही नागरिक है किंतु वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान और उसके आतंकवादियों को मदद करने में हर तरह की मदद करते है। इस सच को यदि करीब से देखना है तो कश्मीर घाटी में जाकर देखिये अपने आप पता लग जायेगा कि किस हद तक हमारे  ही देश के कुछ स्थानीय लोग पाकिस्तान व उसके आतंकवाद की किस हद तक मदद करते आ रहे है।

कभी चिंतन करना ओर सोचना की आतंकवाद के सफाए के लिए या कश्मीर के अमन के लिए  हमारी सेना ने जब जब भी कार्यवाही कि है तब तब जम्मू कश्मीर की राज्य सरकारे क्यों सेना की कार्यवाही में दखल देती आई है क्यों विरोध करती आई है ? क्यों जम्मू कश्मीर के सारे राजनीतिक दल, सारे सामाजिक संगठन, ओर विभिन्न यूनियनें सेना की कार्यवाही का विरोध करते है ? कश्मीर के युवाओं को सेना के खिलाफ किसने भड़काया- कश्मीरी नेताओ ने ही भड़काया है ? पाकिस्तान की कोई औकाद नही कि बिना किसी भारतीय के वह हमारे यहां एक फुलझड़ी भी जला सके ?

कश्मीर में सेना किस विषम परिस्थिति में रह रही है वह तो सेना और उसके जवान ही जानते है। राज्य सरकार को सेना का सहयोग कितना है यह आप इसी से अंदाज़ लगा सकते है कि  किसी राजनीतिक दल के नेता या रसूखदार नेता या किसी कश्मीरी वीआईपी की गाड़ी तक  को सेना के जवान आसानी से चेक नही कर पाते है। सीमा पार के आतंकियों को कुछ लोग अपने घरों में दामाद बनाकर तो कुछ लोग अपना रिश्तेदार बनाकर पनाह देते है और अब तक देते आये है। गोर किया नही कभी कि सेना की सर्चिंग तक का तो कश्मीरी नेता बहुत विरोध करते है ? 

आतंकियों को कश्मीर में पनाह देने के पीछे कुछ स्थानीय लोगो से लगाकर कर वहा की सरकार के सिस्टम के कुछ लोगो व कुछ राजनेताओं की बड़ी भूमिका होती है जो कि उन्हें कश्मीरी पहचान देकर सारी सुविधाएं ओर हथियार बारूद तक मुहैया कराते है। कुछ बड़े रसूखदार ओर कुछ राजनेता सेना पर हमले करने हेतू आर्थिक मदद करने में भी बड़ी भूमिका निभाते है। जो देशभक्त कश्मीरी होता है  वह आतंक के पनाहगारो का विरोध करता है या सेना की मदद करता है तो  उन्हें आतंक के माफिया द्वार या तो धमकाया जाता है या उन्हें कश्मीरी पुलिस द्वारा प्रताड़ित किया जाता है या उनकी सरकारी सुविधाएं बन्द की जाती या फिर उसको या उसके परिजनों को अगवा कर मौत के घाट उतार दिया जाता है। 

कश्मीर का सच यह है कि वहां पर अगर आतंक की गतिविधि में लिप्त एक कुत्ता भी सेना के हाथों मारा जाता है तो कश्मीर की सड़कों पर उस कुत्ते के लिए हजारों लोगो का हुजूम उमड़ पड़ता है लेकिन सेना के किसी एक जवान की शहादत पर अंतर्मन से दो आंसू बहाने वाले मुट्ठीभर कश्मीरी लोग भी आगे नही आ पाते है। 

कश्मीर घाटी का यह सच तब तक ऐसा ही सच रहेगा जब तक हमारे ही अपने बड़े तबके से जुड़े लोग पाकप्रेमी व आतंक के पनाहगार बने रहेंगे ? देश का समूचे राजनीतिक दल सता ओर विपक्ष के लोग भारतीय नागरीको की तरह  पुलवामा हमले में मारे गए सेनिको की शहादत का बदला लेना चाहते है और आतंकवाद को भारतीय धरती से हमेशा हमेशा के लिए मिटाना चाहते है तो  सबसे पहले पाक प्रेम दिखाने वाले उन समस्त राजनीतिक, सामाजिक व अन्य संगठनों के नेताओ के खिलाफ सेना को खुली कार्यवाही करने की छूट भारत सरकार से दिला दे तो मेरा दावा है कश्मीर में तो क्या पूरे देश मे किसी आतंकी के मरने पर दो शब्द तो ठीक दो बूंद आंसू बहाने वाला कोई एक शख्स तक नही आगे आएगा ।

पाकिस्तान को तो सबक सिखाना बहुत आसान है सेना की एक टुकड़ी उसके खात्मे के लिए काफ़ी है किंतु हमारे देश अंदर रह रहे आस्तीन के साँपो को मिटाना बहुत ही मुश्किल भरा कदम है क्योकि हमारे यहां अधिकांशतः जात पात धर्म की राजनीति करने वाले नेता  लोग मौजूद है राष्ट्र की अस्मिता को बचाये रखने वाले मुट्ठीभर नेता नही है। जब तक धर्म जाती से ऊपर उठकर राष्ट्रवादी सोच पैदा नही होगी सभी राजनीतिक दलों के राजनेताओं में तब तक अपनी ही आस्तीन के साँप अपनो  को ही डसते रहेंगे। विडम्बना देखिये इस देश के आम भारतीय की वह बाहरी लोगों से तो बड़ी बहादुरी से जीत कर आ जाता है किंतु उसे आज अपने घर के  आस्तीन के साँपो के हाथों या तो हारना पड़ता है या मरना पड़ता है।
अरविंद रावल
51 गोपाल कॉलोनी झाबुआ म.प्र.
मोबाइल न. 9669902421