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गद्दार सिंधिया वापस जाओ: झांसी में लगे नारे, सिंधिया ने मोदी पर हमला किया | Jyotiraditya Scindia

झांसी। कांग्रेस महासचिव व पश्चिमी यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया दो दिवसीय दौरे पर मध्य प्रदेश जाते वक्त रविवार सुबह दिल्ली से शताब्दी ट्रेन के जरिए झांसी पहुंचे। यहां कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया, वहीं कुछ युवाओं ने उनका जमकर विरोध किया। गद्दार सिंधिया झांसी से वापस जाओ के नारे लगाए।

पीएम मोदी ने वीरों के लिए 2 मिनट मौन भी नहीं रखा

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि, जिन लोगों ने अपनी जान की बाजी लगा दी, उनको केंद्र सरकार शहीद का दर्जा देने से कतरा रही है। इससें बड़ी कोई शर्म की बात नहीं हो सकती। स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को उत्तर देना होगा। जब यह दुखद घटना घटी उस दौरान राष्ट्रीय उद्यान जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में वे क्या कर रहे थे? उन्होंने उत्तराखंड में सभा की लेकिन हमारे वीरों के लिए 2 मिनट मौन भी नहीं रखा। 

जवानों के पास आधुनिक हथियार नहीं हैं

सिंधिया ने कहा कि, जो आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि आज देश में है, कितनी गंभीर स्थिति है, शायद कभी देश के इतिहास में न हुई हो। हमारे वीर सिपाहियों ने सदैव देश के लिए बलिदान दिया है लेकिन आज सरकार जो उनके प्रति अन्याय का रवैया उत्पन्न करके कार्य कर रही है। एयरफोर्स, नेवी और आर्मी में जो हथियार उनके पास होने चाहिए वे भी नहीं है। जनरल फ्लिप कंपोज की रिपोर्ट आई है कि पुलवामां के बाद जैसी घटनाओं के बाद जो काम किया है। उन्हें दुरुस्त करना चाहिए। 

उत्तर प्रदेश में हम जनता का विश्वास जीतने जा रहे हैं

विपक्षी दलों की एक सोच और विचारधारा है कि वर्तमान में भाजपा की पूर्ण रूप से जनता विरोधी सरकार जो केंद्र में बैठी है उसे हटाना है। किसी दल को स्थापित करने के लिए नहीं बल्कि देश को बचाने के लिए भाजपा सरकार को उखाड़कर कर फेंकना है। कांग्रेस पार्टी ने यह निर्णय किया है कि उत्तर प्रदेश में हम पूर्ण मजबूती से लड़ने जा रहे हैं और जनता का विश्वास जीतने जा रहे हैं। 

सिंधिया को झांसी की पवित्र धरती पर नहीं आना चाहिए था

विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का नेतृत्व करने वाले अभिषेक जैन कहते हैं कि अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया झांसी आ ही गए हैं तो उन्हें इलाइट टॉकीज में आकर एक बार मणिकर्णिका फिल्म जरूर देखनी चाहिए। जिससे उन्हें पता चले कि झांसी की रानी के साथ उनके पूर्वजों ने कितनी बड़ी गद्दारी की थी। यदि उनके पूर्वजों ने 1857 में गद्दारी न की होती तो हमारी महारानी नहीं मारी जाती। उन्हें झांसी की पवित्र धरती पर नहीं आना चाहिए था।