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कमलनाथ के शपथग्रहण से पहले बड़े धमाके की तैयारी में भाजपा | MP NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश में सोमवार को कांग्रेस की सरकार के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ शपथग्रहण करने वाले हैं लेकिन इससे पहले देश का सबसे बड़ा पॉलिटिकल ब्लास्ट हो सकता है। भाजपा के हमलावर लड़ाकों ने हिम्मत नहीं हारी है। वो सरकार बनने से पहले ही गिराने की कोशिश में हैं। संडे को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने यह आरोप लगाया है। 

दिग्विजय ने आरोप लगाया है कि बीजेपी अब भी जोड़-तोड़ में लगी हुई है और विधायकों से लगातार संपर्क कर रही है। दिग्विजय ने आरोप लगाया कि बीजेपी के मंत्री जिनका पद छूटा है वो पचा नहीं पा रहे। यही कारण है कि वो आज भी निर्दलीय, बीएसपी, सपा और कांग्रेस तक के विधायकों से संपर्क में लगी है। दिग्विजय ने कहा कि बीजेपी के उन सभी को शर्म आनी चाहिए जो विधायकों के संपर्क में लगे हैं, लेकिन एक भी टूटने वाला नहीं है। 

क्या है आंकड़ों की गणित
भाजपा के सभी नेता इस बात पर एकजुट हैं कि पार्टी को सत्ता में बने रहना चाहिए। लोकसभा चुनाव के लिए भी यह जरूरी है। आइए एक बार फिर समझते हैं आंकड़ों का गणित
भाजपा के पास 109 विधायक हैं। यानी बहुमत से 7 कम। 
कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं। यानी बहुमत से 2 कम। 
बसपा के पास 02 विधायक है। जो शायद ही भाजपा के साथ आएं। 
सपा के पास 01 विधायक है। संभावना है कि भाजपा के साथ आ जाए। 
निर्दलीय कुल 04 विधायक हैं। सभी मंत्रीपद के साथ जाएंगे। फिलहाल कांग्रेस के साथ हैं परंतु भाजपा के साथ भी आ सकते हैं।
फिलहाल कांग्रेस, बसपा, सपा और निर्दलीय मिलाकर 121 विधायकों के समर्थन से सरकार बनने जा रही है।
यदि सदन में वोटिंग के दिन निर्दलीय, बसपा, सपा और कांग्रेस मिलाकर कुल 07 विधायक अनुपस्थित हो जाएं तो कांग्रेस की सरकार गिर जाएगी। 

चौकीदार पर तंज कसा
शिवराज के ट्विटर पर खुद को कॉमन मैन लिखने पर दिग्विजय ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें तो चौकीदार लिखना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि वैसे ये अजीब बात है कि नरेंद्र मोदी पद ग्रहण करने के बाद चौकीदार बनते हैं तो शिवराज पद छोड़ने के बाद।

वचन पत्र को पूरा करने की जिम्मेदारी कमलनाथ की
साथ ही दिग्विजय ने शिवराज की आभार यात्रा को आड़े हाथ लिया और कहा कि अच्छा है इस बहाने उन्हें कुछ काम मिल जाएगा। दिग्विजय ने कांग्रेस को जिताने जनता का आभार जताया और कहा कि कमलनाथ पर जिम्मेदारी वचन पत्र के वचन पूरा करने की। कैबिनेट के 10 दिन के अंदर कमलनाथ को ये निर्णय करना चाहिए।