KISSAN को 750 किलो प्याज के 1064 रुपए मिले, प्रगतिशील किसान ने प्रधानमंत्री को भेज दिए | NATIONAL NEWS

03 December 2018

नई दिल्ली। अटल बिहारी वाजपेयी ( Atal Bihari Vajpayee ) की सरकार प्याज के ज्यादा दामों के कारण गिर गई थी। लोकसभा 2019 से पहले प्याज के कम दामों के कारण नरेंद्र मोदी सरकार के सामने तनाव की स्थिति बनती दिख रही है। महाराष्ट्र की मंडियों में किसानों को प्याज की लागत भी नहीं दी जा रही। महाराष्ट्र के सबसे प्रतिष्ठित प्रगतिशील किसानों में से एक संजय साठे ने 750 किलोग्राम प्याज महज 1064 रुपये में बेच दी और उन्होंने विरोध दर्ज कराने के लिए अपनी कमाई प्रधानमंत्री को भेज दी। 

नासिक जिले के निफाड तहसील के निवासी संजय साठे उन कुछ चुनिंदा ‘प्रगतिशील किसानों’ में से एक है जिन्हें केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा से 2010 में उनकी भारत यात्रा के दौरान संवाद के लिए चुना था। साठे ने रविवार को कहा, ‘मैंने इस मौसम में 750 किलोग्राम प्याज उपजाई लेकिन गत सप्ताह निफाड थोक बाजार में एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर की पेशकश की गई। मैंने 1.40 रुपये प्रति किलोग्राम का सौदा तय किया और मुझे 750 किलोग्राम के लिए 1064 रुपये मिले।’

उन्होंने कहा, ‘चार महीने के परिश्रम की मामूली कीमत प्राप्त होना दुखद है। इसलिए मैंने 1064 रुपये पीएमओ के आपदा राहत कोष में दान कर दिए। मुझे वह राशि मनीआर्डर से भेजने के लिए 54 रुपये अलग से देने पड़े। मैं किसी राजनीतिक पार्टी का प्रतिनिधित्व नहीं करता लेकिन मैं अपनी दिक्कतों के प्रति सरकार की उदासीनता के कारण नाराज हूं।

मनीआर्डर 29 नवम्बर को भारतीय डाक के निफाड कार्यालय से भेजा गया। वह ‘नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री’ के नाम प्रेषित किया गया। पूरे भारत में जितनी प्याज होती है उसमें से 50 प्रतिशत उत्तर महाराष्ट्र के नासिक जिले से आती है।

ओबामा से मुलाकात के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘मैं लंबे समय से (टेलीकाम ऑपरेटर द्वारा संचालित) किसानों के लिए आवाज आधारित परामर्श सेवा का इस्तेमाल कर रहा था। मैं उन्हें फोन करता था और मौसम के बदलाव के बारे में सूचना लेता था और इस तरह से मैं अपनी उपज बढ़ाने में सफल रहा।

साठे ने कहा, ‘मुझे आकाशवाणी के स्थानीय रेडियो स्टेशनों पर कृषि के बारे में अपने प्रयोगों के बारे में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया। इसलिए कृषि मंत्रालय ने मेरा चयन मुम्बई सेंट जेवियर्स कालेज में स्थापित एक स्टाल के लिए किया जब ओबामा भारत आये थे। मैंने उनसे ट्रांसलेटर की मदद से कुछ मिनट बात की।

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