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नंदकुमार सिंह की फर्जी चिट्ठी वायरल लेकिन चौहान अब तक चुप | mp news

भोपाल। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद नंदकुमार सिंह चौहान के कथित लेटरपेड पर लिखी गई एक चिट्ठी वायरल हो रही है। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को संबोधित करते हुए लिखी गई है परंतु शब्दों से साफ समझ आ रहा है कि यह शब्द नंदकुमार सिंह के नहीं हैं। बावजूद इसके नंदकुमार सिंह ने इस वायरल चिट्ठी को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। उनकी चुप्पी चिट्ठी को प्रमाणित कर सकती है। 

क्या लिखा है चिट्ठी में
आप से जबलपुर में मुलाकात के दौरान मैंने मध्य प्रदेश के राजनीतिक हालात और पार्टी स्तर पर लगातार हो रही मेरी एवं मेरे समाज की उपेक्षा का जिक्र किया था आपके द्वारा शीघ्र समाधान निकालने और शिवराज जी व विजयवर्गीय जी को समझाइश देने का आश्वासन भी दिया गया था परंतु खेद के साथ बताना पड़ रहा है की हालत आज भी वैसे ही हैं पिछले दिनों मैंने स्वयं पहल करते हुए शिवराज जी से बात की थी तब उन्होंने मुझे विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न कार्यों में सम्मिलित करते हुए मेरी भूमिका वह महत्वपूर्ण बनाने का आश्वासन दिया था परंतु उनमें से कुछ भी पूरा नहीं हुआ। 

गुजरात में मेरी अपील पर राजपूतों ने भाजपा को वोट दिए
वर्तमान में राजपूत समाज की भाजपा जितनी उपेक्षा कर रही है उससे पार्टी को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है। पार्टी को यह नहीं भूलना चाहिए कि गुजरात चुनाव के दौरान राजपूतों ने भाजपा को मेरे कहने पर ही समर्थन दिया था बाद में मेरे समाज के लोगों ने ही मुझ पर समाज से धोखा करने का आरोप लगाया परंतु पार्टी का एक सच्चा सिपाही होने के नाते में सब सह गया। 

नरोत्तम मिश्रा सीएम बनने के लिए गुटबाजी कर रहे हैं
वर्तमान में टिकट वितरण में भी मेरे समर्थकों की उपेक्षा की जा रही है जिसमें आपको दखल देने की जरूरत है विजयवर्गीय जी और नरोत्तम मिश्रा जी अभी से अपने लोगों को टिकट दिलाकर मुख्यमंत्री बनने के लिए समर्थन की राह आसान करने में लगे हैं जबकि दिल्ली की मीटिंग में नड्डा जी वह गहलोत जी के समक्ष यह तय हुआ था कि चुनाव से पहले जनता को इस बात की जानकारी किसी कीमत पर नहीं होनी चाहिए कि शिवराज को हम दिसंबर में केंद्र में लेकर रक्षा मंत्री बना सकते हैं।

शिवराज के साथ हिमाचल रिटर्न करना चाहिए
शिवराज जी भी अब उस मन से काम नहीं कर रहे हैं जिस मन से करना चाहिए क्योंकि एक तो उन्हें मध्य प्रदेश आने की भनक है और दूसरा वह जानते हैं कि जीतने पर भी मुख्यमंत्री नहीं बनने वाले हैं। भाई साहब यदि मेरा सुझाव माने तो हमें शिवराज को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित कर देना चाहिए और फिर हिमाचल की तरह रणनीति अपनाना चाहिए।
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