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मौसम भी ले रहा है प्रत्याशियों की परीक्षा, तेज हो रहीं हैं सर्द हवाएं | MP NEWS

14 November 2018

भोपाल। राजधानी सहित पूरे प्रदेश में सर्दी ने अपनी आमद का अहसास करा दिया है। दिन भी छोटे होने लगे हैं। साढ़े पांच बजे के बाद ही अंधियारा छाने लगा है। वहीं सूर्योदय भी सात बजे के करीब हो रहा है। बीते 24 घंटों में सबसे कम तापमान 8 डिग्री मंडला में दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार इसकी वजह इस इलाके की ग्रीनरी और नदियों वाला क्षेत्र बताया है। 

इस बार सर्दी का दौर भी लंबा खिंचने की संभावना है। खास वजह यह है कि ठंड के लिए जरूरी माने जाने वाले वेस्टर्न डिस्टरबेंस की फ्रिक्वेंसी इस बार ज्यादा है। इसका असर यह हुआ कि कश्मीर घाटी और हिमाचल में बर्फबारी भी 10-15 दिन पहले शुरू हो गई। हमारे यहां इसका यह प्रभाव पड़ा कि उत्तर से सर्द हवा जल्द आने लगी। 

इस बार नवंबर के पहले पखवाड़े में ही गुलाबी ठंड असर दिखाने लगी थी। दीपावली की रात से ही मौसम का मिजाज सर्द होने लगा। उसके अगले दिन गुरुवार रात को पारा 12 डिग्री से नीचे पहुंचकर सामान्य से 4 डिग्री कम हो गया था। पिछले बुधवार से लगातार रात का तापमान सामान्य से कम बना हुआ है। पिछले साल नवंबर के अंत में ही मौसम ऐसा ठंडा हो सका था। अभी राजधानी के दिन और रात के तापमान में करीब 15 डिग्री अंतर चल रहा है। बुधवार को अधिकतम तापमान 32.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 15.0 दर्ज किया गया। 

नवंबर-2017 में रात का औसत तापमान 14.30 था 
- पिछले साल : 05 नवंबर से 10 फरवरी तक 98 दिनों में पिछले साल कुल 23 दिन ही ठंड पड़ी थी। 
- 24 नवंबर को रात का तापमान 12 डिग्री के करीब और 25 नवंबर को ही 10 डिग्री से नीचे पहुंच सका था। 
- नवंबर में 2 दिसंबर में 7 व जनवरी में 16 दिन ही ठंड पड़ी। 
अनुमान : 17 नवंबर से फिर ऐसी ही ठंड का 3 दिन का एक दौर आने का अनुमान। दिसंबर में 13 और जनवरी में 21 दिन ठंड पड़ने की संभावना। 

इस बार : अभी सिर्फ 13 दिन में ही रात का औसत तापमान करीब 15 डिग्री पहुंच गया। 
- 07 नवंबर को ही तापमान गिरना शुरू हो गया। 
- 08 नवंबर को रात का तापमान 11.4 डिग्री पर पहुंचा। 
- नवंबर के पहले पखवाड़े में ही लगातार 6 दिन रात का तापमान सामान्य से कम रहा। 

क्या है वेस्टर्न डिस्टरबेंस
वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक उदय सरवटे ने बताया कि हवा के ऊपरी भाग में चक्रवाती हवा का घेरा बनता है। यह अफगानिस्तान-पाकिस्तान से कश्मीर-हिमाचल एवं उत्तराखंड तक पहुंचता है। इसे वेस्टर्न डिस्टरबेंस कहते हैं। 



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