बंद हो जाएंगे 50% BANK ATM, नियम बदले, सभी पुरानी मशीनें बंद होंगी

21 November 2018

BANK ATM इंडस्ट्री से जुड़े संगठन CATMI ने बुधवार को चेतावनी दी कि देश के 50% ATM मार्च 2019 तक बंद हो सकते हैं। संगठन ने इसकी वजह नियमों में हुए बदलाव को बताया, जिसके चलते ATM ऑपरेट करना आसान नहीं रह गया है। 50% ATM मार्च में बंद हो सकते हैं 

इन नियमों में बदलाव से ATM संचालन मुश्किल

एटीएम सर्विस प्रोवाइडर की कुल संपत्ति कम से कम 100 करोड़ रुपए होना अनिवार्य।
सर्विस प्रोवाइडर के पार 300 कैश वैन का बेड़ा होना जरूरी। 
हर वैन में दो संरक्षक, दो बंदूकधारी गार्ड और ड्राइवर होना चाहिए। 
CASH VAN हर हाल में CCTV और GPS से लैस होनी चाहिए। 
सभी एटीएम का सॉफ्टवेयर विंडोज एक्सपी से विंडोज 10 में अपग्रेड हो। 
सीएटीएमआई का दावा- सिर्फ कैसेट बदलने के लिए 3500 करोड़ रुपए चाहिए। 
सभी नियम लागू करने के लिए एक एटीएम पर हर महीने खर्च होंगे 1.5 लाख रुपए।

ATM बंद हुए तो काफी लोगों की JOB जाएगी

संगठन के मुताबिक, अगर एटीएम बंद होते हैं तो इस उद्योग से जुड़े काफी लोगों को अपनी नौकरी भी खोनी पड़ सकती है। साथ ही, इसका असर सरकार की वित्तीय एकीकरण की कोशिशों पर भी पड़ेगा। संगठन का मानना है कि एटीएम बंद होने से शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोग परेशान होंगे।

सीएटीएमआई के डायरेक्टर वी बालासुब्रमण्यन ने बताया कि इस वक्त देश में करीब 2.38 लाख एटीएम हैं, जिनमें 1.13 लाख मशीनें बंद होने का अनुमान है। बंद होने वाली मशीनों में एक लाख ऑफ साइट एटीएम और करीब 15 हजार व्हाइट लेबल एटीएम शामिल हो सकते हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, ऑफ साइट एटीएम वे होते हैं, जिन्हें बैंक रिहायशी इलाकों और बाजारों में लगवाती हैं। ये एटीएम बैंक परिसर में नहीं होते हैं। वहीं, व्हाइट लेबल एटीएम नॉन बैंकिंग कंपनियों की ओर संचालित एटीएम को कहा जाता है। 

बालासुब्रमण्यन ने कहा, ‘‘एटीएम बंद होने का सबसे बुरा असर प्रधानमंत्री जनधन योजना के लाखों लाभार्थियों पर पड़ सकता है। ये लोग सब्सिडी के तहत मिलने वाले पैसे को एटीएम से ही निकालते हैं। अगर एटीएम बंद होते हैं तो उन्हें नोटबंदी के बाद जैसे हालात भीड़ और बैंकों में लंबी लाइनों का सामना करना पड़ सकता है।’’

सीएटीएमआई के डायरेक्टर ने बताया कि आरबीआई ने एटीएम से संबंधित नियमों में बदलाव किया था। इनके तहत कैश मैनेजमेंट के स्टैंडर्ड बरकरार रखने और मशीन में कैश रखने की कैसेट बदलने के लिए सीएटीएमआई को मजबूरन एटीएम के सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर अपडेट करने पड़ रहे हैं।

बालासुब्रमण्यन ने बताया कि देश में मौजूद सभी एटीएम में सिर्फ कैश कैसेट बदलने के लिए सीएटीएमआई को 3500 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2018 में आरबीआई ने एटीएम सर्विस प्रोवाइडर और उनके कॉन्ट्रैक्टर पर सख्त नियम लागू कर दिए। ये बदलाव गृह मंत्रालय की ओर से 9 फरवरी को जारी गजट नोटिफिकेशन के तहत किए गए थे।

बालासुब्रमण्यन के मुताबिक, नए नियमों के तहत एटीएम सर्विस प्रोवाइडर की कुल संपत्ति कम से कम 100 करोड़ रुपए होनी जरूरी है। उसके पास 300 कैश वैन का बेड़ा होना अनिवार्य है। हर वैन में दो संरक्षक और दो बंदूकधारी गार्ड और एक ड्राइवर तैनात करना होगा। हर कैश वैन जीपीएस और सीसीटीवी से लैस होनी चाहिए। इसके अलावा सभी एटीएम का सॉफ्टवेयर विंडोज एक्सपी से विंडोज 10 में अपग्रेड होना चाहिए।

सुब्रमण्यन ने बताया कि ये सिक्योरिटी फीचर लागू करने और सॉफ्टवेयर अपडेट करने के लिए एक एटीएम पर हर महीने कम से कम 1.5 लाख रुपए खर्च होंगे। ऐसे में देश के 2.38 लाख एटीएम पर बहुत बड़ी रकम खर्च होगी और एटीएम उद्योग अकेले इतना खर्च करने के लिए तैयार नहीं है। 

आरबीआई और गृह मंत्रालय ने बैंकों को नए नियम लागू करने का निर्देश दिया है। ऐसे में बैंकों को ही अपडेशन में होने वाली लागत देनी होगी, लेकिन बैंक इस मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार नहीं हैं। सुब्रमण्यन ने बताया कि अगर इस समस्या का समाधान नहीं निकलता है तो जनवरी से एटीएम बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

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