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GST: चुनाव में बीड़ी से जल सकता है भाजपा का झंडा | mp news

भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव आ गए हैं। कुछ वर्गों ने भोपाल में विरोध प्रदर्शन करके अपनी मांगें मनवा लीं परंतु कुछ ऐसे भी हैं जो लामबंद नहीं हो पाए लेकिन नाराज बहुत हैं। बीड़ी कारोबारी एवं बीड़ी मजदूरी उन्हीं में से एक हैं। सरकार ने बीड़ी पर डबल GST ठोक रखा है। इसका कुलयोग 46 प्रतिशत है जबकि सिगरेट पर 28 प्रतिशत है। 

बीड़ी मज़दूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट

विधानसभा चुनाव में इस बार गुड्स सर्विस टैक्स यानि GST बीजेपी को झटका दे सकती है। बीड़ी उद्योग यहां की रीढ़ है और जीएसटी का सबसे बड़ा असर बीड़ी उद्योगों पर ही पड़ा है। बीड़ी उद्योगपतियों को तो नुक़सान हुआ ही, इससे जुड़े मज़दूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इसलिए इस बार बुंदेलखंड में GST चुनाव का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।

GST की मार से छोटे बीड़ी उद्योग तो पहली बार मेें ही मर गए 

बुंदेलखंड के सागर, दमोह, छतरपुर की एक बड़ी आबादी बीड़ी उद्योग से जुड़ी है लेकिन इस बार बीड़ी उद्योग से जुड़े मजदूरों की हालत बदतर है। बीड़ी बनाकर अपनी रोजी रोटी चलाने वाली बड़ी आबादी जीएसटी के लागू होने से परेशान है, क्योंकि बीड़ी पर 28 फीसदी जीएसटी लग रहा है। इससे बीड़ी के दाम तो बढ़ गए लेकिन बीड़ी पीने वालों की तादाद घट गयी। मांग घटी तो बीड़ी उद्योग की कमर टूटने लगी। आलम ये है कि घर-घर में चलने वाले छोटे-मोटे बीड़ी उद्योग तेज़ी से सिमट गए।

GST के कारण 8 में से 4 बड़े कारखाने बंद 

GST लागू होने के बाद इस अंचल में 8 में से 4 बड़े कारखाने बंद हो गए। GST लागू होने से पहले बीड़ी पर 20 प्रतिशत वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) लगता था लेकिन GST के बाद अब तेंदू पत्ते संग्रहण पर 18 फीसद टैक्स लगने लगा है। तेंदू पत्ते से बीड़ी बनाने पर 28 फीसद टैक्स लगता है। इस तरह तेंदू पत्ता संग्रह से लेकर बीड़ी बनाने तक पर अब 46 फीसद टैक्स लग रहा है।नतीजन बीड़ी की कीमत में बेतहाशा वृद्धि हुई है। बीड़ी के विकल्प सिगरेट पर 28 फीसद जीएसटी लगता है। दोनों की कीमतों का अंतर कम होने के कारण लोग अब बीड़ी की जगह सिगरेट पीने लगे हैं।
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