BJP को दंगों से फायदा होता है: गार्गा चटर्जी | NATIONAL NEWS

05 October 2018

NEW दिल्ली: इंडिया टुडे कॉन्क्लेव इस्ट के 10वें सेशन की बहस में पश्चिम बंगाल बीजेपी के उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजूमदार ने अपनी पार्टी का पक्ष रखा। गार्गा चटर्जी ने पश्चिम बंगाल के हालिया दंगों पर राय देते हुए कहा येल यूनिवर्सिटी की एक स्टडी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस स्टडी के मुताबिक भारतीय उप महाद्वीप में दंगों से सिर्फ एक पार्टी को फायदा पहुंचता है और वो पार्टी है भारतीय जनता पार्टी। उन्होंने कहा कि दंगा या हिंसा जो भी भड़काए फायदा सिर्फ बीजेपी को ही होगा। इसलिए पश्चिम बंगाल में इसी फॉर्मूले पर काम किया जा रहा है। गार्गा ने बीजेपी को आगाह किया कि पश्चिम बंगाल के लोग बीजेपी के इस षडयंत्र का खुलकर मुकाबला करेंगे।

उन्होंने कहा, "हमें याद रखना चाहिए कि बंगाल में हमारी मां के दो पैर हैं, चार पैर नहीं, और बीजेपी को याद रखना चाहिए कि उनकी मां के पास कोई हाथ नहीं हैं, जबकि हमारी मां के पास दस हाथ हैं, इन दस हाथों से हम बंगाल के खिलाफ बनाये गये हर तरह के षड़यंत्र का खात्मा करेंगे।"

बहस में शिरकत करते हुए बीजेपी नेता जय मजूमदार ने पश्चिम बंगाल के दंगों पर कहा कि ये वोटों के लिए सत्ताधारी पार्टी की साजिश है। जय मजूमदार ने कहा, "इस राज्य में सत्ताधारी पार्टी द्वारा, सत्ताधारी पार्टी के लिए साम्प्रदायिक वैमनस्य पैदा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में दंगों में बाहरी लोगों का हाथ है तो यहां की पुलिस ऐसे तत्वों को गिरफ्तार क्यों नहीं करती है? आखिर लॉ एंड ऑर्डर का मतलब क्या है? उन्होंने मार्क्स का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने धर्म को जनता के लिए अफीम बताया था, लेकिन ममता ने धर्म को वोट बैंक बना दिया, जबकि मोदी धर्म को समाज का बैक बोन बताते हैं, यही विचारधारा का फर्क है।

मालिनी भट्टाचार्य ने टीएमसी पर हमला बोलते हुए सवाल खड़ा किया कि आखिर पश्चिम बंगाल में RSS का उदय कैसे हुआ, इस संगठन ने यहां अपने पांव कैसे पसारे? कैसे आयी, क्या टीएमसी इसे नहीं रोक सकती थी? मालिनी ने कहा कि जब तक लेफ्ट पश्चिम बंगाल में सत्ता में थी बीजेपी का वजूद तो राज्य में था, लेकिन पार्टी हाशिये पर पड़ी थी।

उन्होंने कहा कि टीएमसी और बीजेपी के बीच ऊपरी तौर पर राजनीतिक प्रतिद्वंदिता तो है, लेकिन अंदर से दोनों पार्टियां मिली हुई हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ही पार्टियां जनता में खौफ पैदा करती हैं और एक खास समूह को सुरक्षा देने का भरोसा देती हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इस तरह की राजनीति से सीपीआई-एम को वोटों का नुकसान हुआ है, क्योंकि सीपीआई-एम जनता के अधिकार की लड़ाई लड़ती है।

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