लोकसभा अध्यक्ष ने की SC/ST ACT पर पुनर्विचार की अपील: भारत बंद का असर | NATIONAL NEWS

07 September 2018

भोपाल। अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में संशोधन के बाद उपजे  अनारक्षित समुदाय के आक्रोश का असर दिखाई देने लगा है। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने गुरुवार को अपनी बात रखी। उन्होंने एक प्रसंग के माध्यम से अपनी बात समझाने की कोशिश की। इस तरह उन्होंने सभी दलों के नेताओं का आह्वान किया कि सभी एक साथ आकर यदि अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को समझाएंगे तो बात बन जाएगी। उन्होंने स्पष्ट तो नहीं कहा लेकिन एक तरह से उन्होंने सहमति जताई कि भारत में अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को कुछ ज्यादा ही दे दिया गया है। 

न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने इस कानून में संशोधनों का जिक्र करते हुए यहां भाजपा के व्यापारी प्रकोष्ठ के कार्यक्रम में कहा, सभी राजनीतिक दलों को इस विषय में मिलकर विचार-विमर्श करना चाहिये। इस मुद्दे पर राजनीति नहीं की जा सकती, क्योंकि कानून का मूल स्वरूप बरकरार रखने के लिये संसद में सभी पार्टियों ने मतदान किया था।' 

सभी दलों को SC/ST ACT पर पुनर्विचार करना चाहिए
उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी सरकार का बचाव करते हुए कहा, 'कानून तो संसद को बनाना है लेकिन सभी सांसदों को मिलकर इस विषय (अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निरोधक अधिनियम में किये गये संशोधन) में सोचना चाहिये। इस विचार-विमर्श के लिये उचित वातावरण बनाना समाज के सभी लोगों की जिम्मेदारी है।' लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि वह छोटी-सी 'मनावैज्ञानिक कहानी' के माध्यम से अपनी बात समझाना चाहेंगी। 

दो-तीन समझदार लोग समझाएंगे तो बच्चा समझ जाएगा
उन्होंने कहा, 'मान लीजिये कि अगर मैंने अपने बेटे के हाथ में बड़ी चॉकलेट दे दी और मुझे बाद में लगा कि एक बार में इतनी बड़ी चॉकलेट खाना उसके लिये अच्छा नहीं होगा। अब आप बच्चे के हाथ से वह चॉकलेट जबर्दस्ती लेना चाहें, तो आप इसे नहीं ले सकते। ऐसा किये जाने पर वह गुस्सा करेगा और रोयेगा। मगर दो-तीन समझदार लोग बच्चे को समझा-बुझाकर उससे चॉकलेट ले सकते हैं।' 

एक तबके पर पहले अन्याय हुआ था, अब दूसरे पर हो रहा है
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, 'किसी व्यक्ति को दी हुई चीज अगर कोई तुरंत छीनना चाहे, तो विस्फोट हो सकता है।' उन्होंने सम्बद्ध कानूनी बदलावों को लेकर विचार-विमर्श की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, 'यह सामाजिक स्थिति ठीक नहीं है कि पहले एक तबके पर अन्याय किया गया था, तो इसकी बराबरी करने के लिये अन्य तबके पर भी अन्याय किया जाये।' 

हमें अन्याय का बदला अन्याय पूरा नहीं करना, न्याय करना है
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, 'हमें अन्याय के मामले में बराबरी नहीं करनी है। हमें लोगों को न्याय देना है। न्याय लोगों को समझाकर ही दिया जा सकता है। सबके मन में यह भाव भी आना चाहिये कि छोटी जातियों पर अत्याचार नहीं किया जायेगा।'
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